मेरठ। करीब एक दशक बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़े बदमाशों का फिर सिंडिकेट बन गया है। पश्चिम के बड़े कारोबारी और व्यापारी इनके निशाने पर हैं। इस जरायम को जेल में और पेशी के दौरान खाद-पानी मिल रहा है। इन गैंगों के पास अत्याधुनिक हथियार हैं।
खुद सेफ, समाज अनसेफ
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस समय प्रोफेशनल तरीके से जरायम को अंजाम दिया जा रहा है। करीब 27 ऐसे टॉप के बदमाश हैं जो हर जिले में अपने हिसाब से नेटवर्क चला रहे हैं। इनमें अधिकांश बड़े बदमाश जेल के अंदर सेफ रहते हैं, लेकिन इनके खास गुर्गे और शूटर जेल से बाहर रहकर उगाही और सुपारी लेकर हत्या कर रहे हैं। यानी जरायम के आका खुद सेफ हैं, लेकिन समाज अनसेफ है। जेल में हो या जेल से बाहर पेशी पर, किस कारोबारी या व्यापारी से कब और कैसे संपर्क करना है, इसकी सूचना इनके गुर्गों तक पहुंच जाती है।
गजब का सिंडिकेट
हर बड़ा बदमाश एक-दूसरे के संपर्कों को जानता है। इसलिए हर जिले में जिन व्यापारियों, कारोबारियों या ग्रुप से उगाही का इनका जो बेस टारगेट है, उसमें कोई दूसरा हस्तक्षेप नहीं करता। रंगदारी हो या चौथ वसूली, सब सिस्टम से चलता है। यह भी स्पष्ट रहता है कि किसके पास कौन सा ठेका कब तक रहेगा।
महंगे शौक
इन बदमाशों के अलावा इनके खास गुर्गों के भी महंगे शौक हैं। टी-शर्ट, जींस और शूज से लेकर सिगरेट तक ब्रांडेड। पेशी के दौरान मिनरल वाटर।
तकनीक में आगे
गश्त के दौरान फैंटम पर सिपाही और उसके पीछे थ्री-नॉट-थ्री लेकर चल रहा होमगार्ड आपको कहीं भी दिख जाएगा, लेकिन बदमाश कारबाइन से लेकर एके-47 तक रखते हैं। छोटे और हल्के हथियार (पिस्टल) गिने-चुने सिपाहियों या दरोगा पर मिलेंगे, लेकिन इन बदमाशों के गुर्गों और शूटरों के पास इनसे भी आधुनिक असलहे रहते हैं। इनका नेटवर्क भी इतना फास्ट होता है कि वारदात के बाद जब तक पुलिस संभलती है, बदमाश जिले की सीमा पार कर चुके होते हैं।
युवा टीम को कमान
सबसे चिंताजनक पहलू यह भी है कि बड़े गैंगों के मुखिया जरायम की युवा टीम खड़े कर चुके हैं। ये ऐसे युवा हैं जिनका कहीं कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। जब तक कई केसों में इनका नाम सामने नहीं आता या इनकी मुखबिरी नहीं होती। तब तक ये पकड़े नहीं जाते। ऐसे में पुलिस के पास अंधेरे में तीर चलाने के अलावा कोई चारा नहीं होता।
पॉश ठिकाने
शहरी क्षेत्र में इन बदमाशों के ठिकाने पॉश एरिया में हैं। गंगानगर, पल्लवपुरम, शताब्दी नगर, टीपी नगर, कंकरखेड़ा आदि पॉश कालोनियों में इनके ठिकाने बताए जाते हैं।
बदमाशों का सिंडिकेट तोड़ना भले ही चुनौती माना जाता हो, लेकिन यह असंभव नहीं है। बड़े बदमाशों की गतिविधियों पर करीब से नजर रखी जा रही है। बदमाश जेल में हो या पेशी पर, इनकी कुंडली खंगाली जा रही है। अभियान चल रहा है। जल्द नतीजे सामने आएंगे।
आलोक शर्मा, आईजी जोन