मेरठ। राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर) में बवाल काटने वाले सिर्फ कागजों में नाबालिग हैं। इनकी संख्या करीब 38 है। प्रशासन को भी यह मालूम है कि इनकी उम्र 18 साल से ज्यादा है। मगर बाल संरक्षण के नियमों की वजह से जिला जेल में स्थानांतरित नहीं किया जा रहा है।
दरअसल, किसी भी आपराधिक मामले में गिरफ्तार होने पर खुद को नाबालिग दिखाने का खेल काफी समय से चल रहा है। सुभाषनगर निवासी करन कौशिक की हत्या के मामले में भी दो आरोपियों ने खुद को नाबालिग दर्शाया। उसके लिए एक स्कूल से सर्टिफिकेट बनवाकर पेश किया गया। सर्टिफिकेट को चुनौती देते हुए करन के पिता राकेश कौशिक ने छानबीन कराई, जिसमें मालूम चला कि सर्टिफिकेट फर्जी है। इसके बाद आरोपियों को बच्चा जेल से जिला जेल में स्थानांतरित करने की मांग की, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके अलावा इंचौली क्षेत्र के सलारपुर निवासी छात्र विशाल की हत्या के मामले में भी एक आरोपी ने खुद को नाबालिग दर्शाने के लिए फर्जी प्रमाण पत्र बनवा लिए थे। इस तरह के कई मामले हैं। बता दें कि संप्रेक्षण गृह में हर बार बवाल करने और कराने में इन्हीं वयस्क बंदियों की भूमिका रहती है।
स्थानांतरण पर हो चुका है विचार:
राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर) में मेरठ सहित गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, हापुड़, बागपत और बुलंदशहर से विभिन्न मामलों में पकड़े गए किशोरों को लाया जाता है। इस कारण संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में 170 से ज्यादा किशोर यहां हैं, जबकि क्षमता सिर्फ 100 की है। पिछले महीने शासन स्तर पर हुई मीटिंग में भी मेरठ के राजकीय संप्रेक्षण गृह के बिगड़ते हालात पर चर्चा हुई थी। तब विचार किया गया था कि गौतमबुद्धनगर में प्रस्तावित संप्रेक्षण गृह में किशोरों को शिफ्ट कर दिया जाएगा, मगर उस पर अमल नहीं हो सका।
संप्रेक्षण गृह से जुड़ी कुछ वारदातें:
- चार माह पूर्व संप्रेक्षण गृह से खिड़की उखाड़कर 42 किशोर फरार हुए।
- छह माह पूर्व बिल्डिंग से पाइप के सहारे नीचे उतरकर आठ किशोर फरार हुए।
- आठ माह पूर्व अस्पताल से दवा लेने गए चार किशोर फरार हुए, दिल्ली से बरामद।
- 2013 में दिल्ली पुलिस के दरोगा और सिपाही से संप्रेक्षण गृह में मारपीट की गई थी।
- टीपीनगर क्षेत्र के शिवपुरम निवासी किशोर की जहर खाने से मौत हुई।