मेरठ। भावनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से गर्भवती को लौटाए जाने के बाद देर रात ठेले पर ही प्रसव और नवजात की मौत के मामले में सीएचसी प्रभारी और स्टाफ कठघरे में है। महिला को एक नहीं तीन बार (सुबह 7 बजे, दोपहर 2 बजे और देर रात 11 बजे) अस्पताल लेकर जाता है। लेकिन न तो मरीज को भर्ती किया जाता है और न ही रेफर। सीएचसी प्रभारी भी मामले की सूचना के 9 घंटे बाद अगले दिन सीएचसी पहुंचते हैं। यह खुलासा मामले में बैठाई गई जांच रिपोर्ट में हुआ है।
जांच अधिकारी एसीएमओ डॉ. एससी जौहरी ने रिपोर्ट सीएमओ को सौंप दी है। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में कहा गया है कि सीएचसी प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केसी तिवारी का काम एवं स्टाफ पर नियंत्रण नहीं है। इस मामले में खुद उन्होंने भी घोर लापरवाही की है। ठेले पर प्रसव की सूचना स्टाफ ने रात में ही उन्हें दे दी, लेकिन अगले दिन सुबह करीब 11 बजे पहुंचे। स्टाफ नर्स पूजा गुप्ता भी जांच के घेरे में हैं। सूत्रों के मुताबिक जांच अधिकारी ने यह भी आशंका जताई है कि मरीज को मेडिकल कॉलेज रेफर किए जाने संबंधी लेटर फर्जी है। उस पर दिखाए गए महिला के पति के अंगूठे के निशान की जांच कराने की आवश्यकता है। रिपोर्ट में यह भी है कि मरीज रेफर करने के लिए स्टाफ नर्स ने 108 एंबुलेंस को फोन नहीं किया है। सूत्रों की मानें तो रिपोर्ट में दोषी स्टाफ के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई से लेकर स्थानांतरण तक की संस्तुति की गई है।
जांच रिपोर्ट में उठाए गए सवाल
- भावनपुर सीएचसी पर आवास होने के बाद प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक क्यों नहीं करते निवास?
- इतने बड़े केंद्र में महिला डॉक्टर क्यों नहीं, अगर किसी कारण से नहीं थी तो फिर पुरुष डॉक्टर कहां थे?
- रोस्टर के हिसाब से स्वास्थ्य केंद्र पर स्टाफ की ड्यूटी नहीं लगाई जाती है।
यह है मामला
31 मई को पचपेड़ा निवासी फरहाना को प्रसव पीड़ा के चलते उसका पति सलीम ठेले पर लेकर भावनुपर सीएचसी में भर्ती कराने के लिए पहुंचा था। भर्ती न किए जाने पर वह पत्नी को लेकर देर रात घट लौट रहा था। रास्ते में ठेले पर ही महिला को प्रसव हो गया था। नवजात की दो-तीन घंटे बाद घर में मौत हो गई थी। अखबारों में खबर प्रकाशित होने के बाद सीएमओ ने मामले में जांच बैठा दी थी।