मेरठ। पशुओं के अवैध कटान पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन और मंडलायुक्त तथा डीएम समेत नौ लोगों को नोटिस जारी किया है। मेरठ में चल रहे अवैध मिनी कमेलों के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। सभी लोगों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए गए हैं।
आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना ने शहर में हो रहे पशुओं के कटान की शिकायत करते हुए मंडलायुक्त मनजीत सिंह को 15 अप्रैल को पत्र सौंपा था। उन्होंने समाचार पत्रों में अवैध कटान और पशुओं की तस्करी से संबंधित प्रकाशित समाचार पत्रों की कटिंग भी लगाते हुए इसे रोकने की मांग की थी। पत्र पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो लोकेश खुराना ने जनहित याचिका दायर करने के लिए मंडलायुक्त को नोटिस भेजा। इसके बाद मई में जनहित याचिका दायर कर दी।
याचिका में लोकेश खुराना ने बताया कि घोसीपुर शिफ्ट हुआ कमेला संचालित तो नहीं हुआ, लेकिन शहर में कई मिनी कमेले जरूर खुल गए। इनमें अवैध कटान चल रहा है। लोकेश खुराना ने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 26 मांस निर्यातक इकाइयां हैं, जिनमें सात मेरठ में पंजीकृत हैं। हालांकि इस समय चार ही संचालित हैं। मांस के निर्यात के कारण पशुओं की तस्करी भी हो रही है। इस याचिका पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राकेश तिवारी ने पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम के अधिवक्ता को तलब किया। जब वो लोग संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए तो मामले में आरोपी बनाए गए अधिकारियों और मांस निर्यातक इकाइयों के मालिकों को नोटिस जारी कर दिए।
चीफ जस्टिस ने शुक्रवार को मामले में प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन, मंडलायुक्त मेरठ, जिलाधिकारी मेरठ, नगर आयुक्त मेरठ, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी, एपिडा निदेशक के साथ ही मीट निर्यातक इकाई अल जुनैद, शमीम एंड कंपनी और अल फहीम मीटेक्स प्राइवेट लिमिटेड को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया है।