मेरठ। पति द्वारा दो माह पहले गुस्से में तलाक देने का मामला बुधवार को पंचायत में पहुंचा। पिलोखड़ी पुल स्थित फलक पैलेस में आयोजित पंचायत में दोनों पक्षों को सुनने के बाद पंचायत ने महिला को तत्काल प्रभाव से हलाला का फरमान सुनाया। इसके बाद बताया गया महिला चार माह से मायके में इद्दत पर बैठी है।
पिलोखड़ी रोड निवासी युवक का निकाह दो साल पहले खरखौदा क्षेत्र की युवती से हुआ था। दोनों से एक बेटा भी हुआ। दो माह पहले दंपति के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ तो पति ने गुस्से में तलाक दे दिया। युवती का तर्क था कि उसने तलाक के शब्द नहीं सुने थे। वहीं ससुराल वालों का दावा था कि युवक ने उनके सामने पत्नी को तलाक दिया है। यह विवाद पिलोखड़ी चौकी पहुंचा था। पत्नी के बयानों के आधार पर चौकी पर मौजूद लोगों ने उन्हें साथ रहने का फैसला सुनाया था। लेकिन युवक के परिजन तलाक को सही मानते हुए शरीयत के हिसाब से हलाला पर अडे़ थे। इसके बाद उन्होंने दोनों को घर से निकाल दिया था। दंपति दो माह से किराए के मकान में रह रहे थे। तीन दिन पहले युवक अपनी पत्नी के साथ फिर घर पहुंचा। यह परिजनों को नागवार गुजरा।
अब यह करना होगा:
करीब तीन घंटे की पंचायत में शरीयत के हिसाब से तलाक को जायज मानते हुए पत्नी को चार माह की इद्दत पर बैठने का फरमान सुनाया। फैसले के मुताबिक महिला को बुधवार से ही इद्दत करनी होगी। इसके बाद उसे दूसरे युवक से निकाह कर उसे अपना पति मानना होगा। फिर दूसरा पति उसे तलाक देगा। इसके बाद उसे फिर से चार माह की इद्दत करनी होगी। फिर वह अपने पहले पति से निकाह कर सकेगी। फैसले के बाद महिला इद्दत पर अपने मायके चली गई।
यह होता है हलाला:
शरीयत के हिसाब से अगर कोई अपनी पत्नी को तलाक देता है और इसके बाद उसे पछतावा होता है तो उसकी पत्नी को पहले दूसरे युवक से निकाह कर करना पड़ता है। इसके बाद उससे तलाक लेना होता है। फिर कहीं जाकर महिला पहले पति से निकाह कर उसके साथ रह सकती है।
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वर्जन
शरीयत के हिसाब से पंचायत का फैसला सही है। अगर युवक ने दो बार तलाक शब्द कहा होता तो रिश्ते में गुंजाइश होती। लेकिन उसने तीन बार तलाक कह दिया है तो यह मान्य होगा।
-जैनुस साजिद्दीन, शहर काजी