मेरठ। सीसीएसयू प्रशासन और प्रिंसिपलों की बैठक में दाखिला प्रक्रिया से पहले मुख्य परीक्षा की फीडबैक को लेकर बात हुई। इस बार विवि ने पेपर भेजने के लिए नोडल सेंटर बनाए थे। किसी ने समय पर उत्तर पुस्तिका नहीं भेजने की शिकायत की तो किसी ने बुजुर्ग केंद्र अधीक्षक न बनाने का सुझाव दिया।
रिजल्ट की बात आई तो कॉलेजों द्वारा प्रैक्टिकल, वायवा और इंटरनल नंबर समय पर न भेजने की बात सामने आई। परीक्षा नियंत्रक ने कहा कि यह भी शिकायत है कि शिक्षक अवार्ड लिस्ट खुद भरने की जगह छात्रों से भरवा रहे हैं। वक्त पर नंबर नहीं मिलने की वजह से रिजल्ट में देरी होती है। सीनियर सुपरिंटेंडेंट बनने के लिए 20 साल का अनुभव कम करने की मांग उठी। कुलपति ने कहा कि प्राइवेट छात्र की सीट कॉलेजों के हिसाब से तय की जाएंगी। कुछ कॉलेजों की शिकायत थी कि विवि ने उनकी सहमति के बिना सीट बढ़ा दी और परीक्षा में इंतजाम के लिए कुर्सी मेज मांगनी पड़ी। परीक्षा में बी कॉपी खत्म करने से लिखने की प्रवृति में सुधार होने की बात कही गई। बैठक में कुलपति विक्रम चंद्र गोयल, रजिस्ट्रार ओम प्रकाश, वित्त नियंत्रक अनिल अग्रवाल, परीक्षा नियंत्रक प्रो. एचएस सिंह, वरिष्ठ प्रिंसिपल डा. रीता बख्शी और प्रो. वाई विमला मौजूद रहीं।
फिजिकल एजुकेशन पर होगा विचार
बीएससी फिजिकल एजुकेशन केवल दो कॉलेज में है। गाजियाबाद के एमएमएच कॉलेज और सहारनपुर के गोच्चर महाविद्यालय। यूजीसी के नियम मुताबिक दाखिले के लिए 10 प्रतिशत थ्योरी के नंबर और 90 प्रतिशत फिजिकल फिटनेस के नंबर जुड़ते हैं। दाखिले कैसे किए जाएं इस पर विचार करने के लिए कहा गया।