सरधना। मेहराजुद्दीन प्रकरण पुलिस के गले की फांस बन गया है। जनसूचना अधिकार के अंतर्गत मांगी सूचना के बाद एसएसपी ने मेहराजुद्दीन के परिवार को सुरक्षा मुहैया करा दी। अब सुप्रीम कोर्ट ने मामले में गृह सचिव, डीजीपी, एसएसपी समेत चार पुलिस अफसरों को छह मई को अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है।
नगर के मोहल्ला सराय भटियारी निवासी सलमा पत्नी मेहराजुद्दीन ने पुलिस के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली थी। उसके पुत्र कासिम का 27 मई 2010 को अपहरण करके उसे फर्जी तरीके से जेल भेज दिया था। तत्कालीन इंस्पेक्टर रामतीर्थ व एसएसआई आशुतोष के खिलाफ कोर्ट के आदेश से रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसी प्रकरण के साथ चार फर्जी मुकदमों की जांच व पुलिस कर्मियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे की जांच डीजीपी ने कराई थी। सलमा का आरोप है कि जांच में पुलिस कर्मी दोषी पाए गए, मगर अधिकारियों ने जांच को दबा दिया। इसी के चलते सलमा ने 21 मई 2010 में डीजीपी व अल्पसंख्यक आयोग में शिकायत दर्ज कराने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। फिर फरवरी 2012 में कोर्ट के आदेश पर तत्कालीन सीओ विजय प्रकाश, इंस्पेक्टर जितेन्द्र कुमार समेत 11 पुलिस कर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर अदालत ने छह मई को प्रदेश के गृह सचिव, डीजीपी व एसएसपी, इंस्पेक्टर जितेन्द्र कुमार सरधना को उपस्थित रहने के आदेश दिये हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। पीड़ित पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का वह आदेश भी दिखाया है।