मेरठ। छावनी क्षेत्र में करोड़ों की विरासत को वसीयत के आधार पर धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। एनओसी पर लगी रक्षा मंत्रालय की रोक के बाद छावनी क्षेत्र में सुरक्षा को ताक पर रखकर संपत्तियों को बेचने का खेल चल रहा है। बीते डेढ़ सालों में छावनी में एक भी संपत्ति की रजिस्ट्री नहीं हुई, जबकि 250 से अधिक संपत्तियों को वसीयत के आधार पर बेचा जा चुका है।
छावनी क्षेत्र में भूमि का मालिकाना हक रक्षा मंत्रालय भारत सरकार को है। संपत्तियों पर बैठे लोग सिर्फ कब्जेदार हैं। मंत्रालय द्वारा संपत्तियों को लीज पर दिया जाता है। कब्जेदार संपत्ति को तो बेच सकता है, लेकिन जमीन को नहीं बेचा जा सकता। हुआ यूं कि अचानक सोना बनी सैन्य भूमि पर भूमाफिया की नजर पड़ी और भूमि की औने-पौने दामों पर खरीद-फरोख्त होने लगी। बगैर छावनी बोर्ड की जानकारी के लोगों ने रजिस्ट्री कराना शुरू कर दिया। वाराणसी कैंट बोर्ड ने ऐसा ही मामले सामने आने पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
क्या था मामला
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वाराणसी कैंट में हो रही रजिस्ट्री के खिलाफ कैंट बोर्ड ने 2008 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने 28 अगस्त 2010 को आदेश जारी किया कि बगैर छावनी बोर्ड की एनओसी कोई रजिस्ट्री न की जाए। कोर्ट के आदेश के बावजूद रजिस्ट्री होती रहीं। इस पर कोर्ट की अवमानना की पीआईएल 22 दिसंबर 2010 को वीरेंद्र सिंह और अन्य ने दाखिल की। इस पर कोर्ट ने इसे सभी कैंट क्षेत्र में लागू करने के आदेश दिए। 12 फरवरी 2011 को तत्कालीन उप सचिव मधु माथुर ने महानिरीक्षक निबंधन उप्र इलाहाबाद को पत्र जारी कर कोर्ट के आदेश का अनुपालन करने के आदेश दिए।
रक्षा मंत्रालय ने लगाई एनओसी पर रोक
पहले सुकना सैन्य भूमि घोटाले और फिर मुंबई आदर्श सोसाइटी घोटाले से सहमे रक्षा मंत्रालय ने सभी कैंट बोर्ड को पत्र जारी कर निर्देश दिए कि बगैर मंत्रालय से अनुमति लिए किसी भी भूमि के संबंध में एनओसी नहीं जारी की जाएगी।
वसीयत पर बेच रहे संपत्ति
सब रजिस्ट्रार चतुर्थ राम दयाल कहते हैं कि छावनी बोर्ड से एनओसी न मिलने और सख्त नियमों के चलते लोग वसीयत के आधार पर 100 रुपये के स्टांप पर संपत्तियों को बेच रहे हैं। ऐसे दो-तीन मामले हर दिन आते हैं। बगैर रजिस्ट्री के बेची गई संपत्ति को कोर्ट में चैलेंज किया जा सकता है।
राजस्व का घाटा, सुरक्षा को खतरा
कोर्ट ने छावनी की संवेदनशीलता को देखते हुए ही एनओसी के बगैर रजिस्ट्री पर रोक लगाई थी, लेकिन वसीयत पर बेची गई संपत्तियों का कोई रिकॉर्ड न होने से जांच हो सकती है। इससे खतरा तो बढ़ा ही है।
वर्जन
एनओसी न देना लोगों के अधिकार का हनन है। ऐसा न कर छावनी बोर्ड लोगों को गैरकानूनी कार्य करने को प्रेरित कर रहा है। लोग वसीयत के आधार पर संपत्तियों को खरीदकर रिस्क ले रहे हैं।
- जयगोपाल आनंद, अधिवक्ता
- ऐसा कोई मामला संज्ञान में नहीं है। ऐसा है तो जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
- प्रशोतम लाल, सीईओ