मेरठ। प्रदेश में 52 प्रतिशत बुजुर्ग अपने पुत्र-पुत्रवधू के ताने और गालियां सुनने को मजबूर हैं। अकेलापन उन्हें खाए जा रहा है। योजना और देखभाल की कमी वरिष्ठ नागरिकों को दुख दे रही है। महिलाओं के कामकाजी होने का असर बुजुर्गों की देखभाल पर पड़ा है। ऐसे में युवाओं की जिम्मेदारी बनती है कि वे आगे आकर अपने बड़ों को सम्मान और केयर दें। आरजी पीजी कालेज में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में यह बातें हेल्प एज इंडिया के निदेशक और प्रदेश प्रमुख एके सिंह ने कही।
‘सीनियर सिटिजन : प्रॉबलम्स एंड प्रोस्पेक्टिव्स ए मल्टी डिसिपिलिनरी एप्रोच’ पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार मनोविज्ञान विभाग में गुरुवार को शुरू हुआ। हेल्प एज इंडिया (एनजीओ) 1978 से सीनियर सिटिजन के लिए काम कर रही है। एके सिंह ने एनजीओ के सर्वे का हवाला देते हुए बताया कि देश में 33 प्रतिशत बुजुर्ग अपने पुत्र और पुत्रवधू के दुर्व्यवहार से परेशान हैं। प्रदेश में यह आंकड़ा 52 प्रतिशत है। फिलहाल देश में करीब तीन करोड़ बुजुर्ग हैं। औसत आयु बढ़ने की वजह से तेजी से बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही हैं। जो आज युवा हैं, वे जब बुजुर्ग होंगे, तो संख्या करीब 30 करोड़ पहुुंचने का अनुमान है। संयुक्त परिवार की परंपरा खत्म हो रही है। बुजुर्गों की देखभाल का जिम्मा सिर्फ महिलाओं का नहीं है। युवाओं (पोता-पोती) को जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी कि वे अपने दादा-दादी की देखभाल करें।
सिंह ने इस बात पर भी जोर दिया कि बुजुर्ग अपना रिटायरमेंट प्लान तैयार करें। ओल्ड एज ग्रुप बनाएं, ताकि एक-दूसरे का साथ दे सकें। बुजुर्ग महिलाओं की स्थिति और भी खराब है। विधवा होने पर उनकी परेशानी ज्यादा हो जाती है। सीसीएसयू के प्रति कुलपति प्रो. जेके पुंडीर ने आधुनिक समय की चुनौतियों के बुजुर्गों पर पड़ रहे प्रभाव के बारे में बताया। मुंबई लायंस क्लब के डिस्ट्रिक्ट चेयरमैन सी. दोशी और डा. आनंद भूषण ने भी विचार रखे। प्रिंसिपल डा. सीमा जैन ने अतिथियों को धन्यवाद दिया। मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डा. कुमकुम सिंह ने संयोजन किया।