मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय छात्र संघ अध्यक्ष ने महामंत्री पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। अध्यक्ष ने जान का खतरा बताते हुए मेडिकल थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। महामंत्री पर इससे पहले भी दो आरोप लग चुके हैं।
छात्र संघ गठित हुए अभी एक महीना भी नहीं हुआ है कि पदाधिकारी विवादों में घिरने लगे हैं। ताजा मामला छात्र संघ अध्यक्ष संजीव दुर्जन को मिली धमकी का है। धमकी देने का आरोप छात्र संघ के महामंत्री अनुज कुमार पर लगाया गया है। छात्र संघ अध्यक्ष ने बताया कि शनिवार को वे फंफूड़ा स्थित एक बीएड कालेज गए थे। उन्हें शिकायत मिली थी कि यहां अनुसूचित जाति के छात्रों का दाखिला जीरो फीस पर नहीं किया जा रहा है। वहां से लौटने पर महामंत्री अजय कुमार ने उन्हें फोन कर धमकी दी। बकौल अध्यक्ष महामंत्री ने कहा कि कालेज उनके जान पहचान वालों का है। वहां क्या करने गए? अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि महामंत्री ने कैंपस में आने पर गोली मारने की धमकी दी। अध्यक्ष की तरफ से मेडिकल थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। उधर, शाम में अध्यक्ष और महामंत्री के समर्थक छात्रसंघ कार्यालय में जमा हुए। मामले में समझौता का प्रयास हो रहा था। बताते चलें कि संजीव दुर्जन एबीवीपी पैनल और अनुज कुमार समाजवादी छात्रसभा पैनल से जीतकर आए हैं।
छात्र राजनीति भूले पदाधिकारी
मेरठ। छात्र संघ चुनाव से पहले बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता जीतने के बाद अपने काम से नहीं, बल्कि विवादों से चर्चाओं में हैं। पदाधिकारियों का न तो आपस में तालमेल है और न ही किसी ने अभी तक एक भी चुनावी वादा पूरा नहीं किया है। उल्टा वे विवादों में हैं। इससे पहले भी महामंत्री के खिलाफ दो शिकायतें प्रोक्टोरियल बोर्ड में पहुंच चुकी हैं। मेस ठेकेदार को पीटने और लाइब्रेरी में बाहरी लोगों को घुसाने के आरोप महामंत्री पर लगे हैं। इन मामलों में सुनवाई चल रही है। वहीं, छात्र संघ अध्यक्ष संजीव दुर्जन और कोषाध्यक्ष नितिन कुमार टोल प्लाजा पर चल रहे भाकियू के धरने में शामिल होने पहुंच गए, जबकि उनके वहां जाने का कोई औचित्य नहीं है। शनिवार को वह एक बीएड कालेज में छात्रों के दाखिला कराना पहुंचे।
छात्र समस्याओं पर ध्यान नहीं
कालेज में दाखिला नहीं होने से छात्र परेशान हैं। काई छात्र बैक पेपर फार्म नहीं भर सके। वेबसाइट में दिक्कत की वजह से कई दिनों तक फार्म डाउनलोड नहीं हुआ था। डिग्री और मार्कशीट बनवाने में अभी भी ‘खेल’ चल रहा है। पदाधिकारियों का इन समस्याओं पर ध्यान नहीं है।