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अवैध कांप्लेक्स : बेदखली पर स्टे की आड़ में लगा दिया शटर

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अवैध कांप्लेक्स : बेदखली पर स्टे की आड़ में लगा दिया शटर
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- अवैध कांप्लेक्स के ध्वस्तीकरण के बाद बिल्डर ने किया खेल, एमडीए सचिव ने कराई जांच
- बिल्डर को मिले स्टे पर प्रशासन की भूमिका संदेह के घेरे में, रिट पर प्रशासन ने नहीं की पैरवी
- हाईकोर्ट के निर्देश पर चल रही है एडीएम एफ के यहां सुनवाई
मेरठ।
हापुड़ अड्डा चौराहा स्थित खसरा नंबर 4632 में बने अवैध कांप्लेक्स मामले में नया मोड़ आ गया है। इस पूरे मामले में जांच के बाद प्रशासन ने इस जमीन को नजूल की भूमि बताकर सभी कब्जेदारों को नोटिस जारी किए थे। इस पर बिल्डर ने अपर सिविल जज कोर्ट में रिट दायर की। प्रशासन की ओर से पैरवी नहीं किए जाने से बिल्डर को बेदखली पर स्टे मिल गया, जो कि प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर रहा है। वहीं बिल्डर ने भी स्टे की आड़ में शटर लगा दिया। उसकी मंशा पर भी सवाल उठने लगे हैं।
खसरा नंबर 4632 में एक बिल्डर ने 66 दुकानों का कांप्लेक्स खड़ा करा दिया था। यह जमीन राजस्व अभिलेखों में नजूल की दर्ज है। इसका खुलासा 21 जून 2017 को अमर उजाला ने किया तो तत्कालीन मंडलायुक्त डा. प्रभात कुमार के निर्देश पर जांच शुरू हुई। जांच में पाया गया कि बिल्डर ने कांप्लेक्स का नक्शा भी एमडीए से स्वीकृत नहीं कराया है। इस पर एमडीए ने कांप्लेक्स पर सील लगाकर सरकारी जमीन होने का बोर्ड लगा दिया। बाद में कांप्लेक्स को ध्वस्त करा दिया।
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इस जमीन के 93 कब्जेदाराें को एडीएम वित्त एवं राजस्व ने नोटिस जारी किए। इस पर कब्जेदार हाईकोर्ट चले गये। हाईकोर्ट से एडीएम के यहां से ही मामले का निस्तारण किए जाने का आदेश किया। इस बीच बिल्डर ने अपर सिविल जज सीनियर डिविजन कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में बिल्डर ने अपने पक्ष में कई साक्ष्य प्रस्तुत किए। उन्होंने पुराने बैनामा को भी दर्शाया। लेकिन बार-बार की सुनवाई के बाद भी प्रशासन ने इस मामले में अपनी तरफ से कोई साक्ष्य प्रस्तुत करना तो दूर पैरवी तक नहीं कराई। प्रशासन की लापरवाही के चलते कोर्ट ने 17 अप्रैल को आदेश दिया कि जब तक यह प्रकरण निस्तारित नहीं हो जाता, वादी (बिल्डर) को अवैधानिक रूप से बेदखल न करें। वादी के कब्जे में हस्तक्षेप न करें। वहीं बिल्डर ने स्टे की आड़ में कांप्लेक्स के मुख्य गेट के टूटे शटर को दोबारा लगा दिया।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
पूरे प्रकरण की सुनवाई एडीएम वित्त एवं राजस्व की कोर्ट में चल रही है। एडीएम ही नजूल प्रभारी हैं। लेकिन कोर्ट में उनके द्वारा पैरवी न किया जाना, कहीं न कहीं प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठा रहा है। क्योंकि सारे अभिलेख और साक्ष्य होने के बाद ही प्रशासन ने पूर्व में कार्रवाई की थी। लेकिन कोर्ट में पैरवी के साथ साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए। इस पूरे प्रकरण में पूर्व एडीएम एफ की भूमिका संदिग्ध हो गई।
फिर जाऊंगा हाईकोर्ट
प्रकरण को उठाने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट सचिन सैनी का कहना है कि प्रशासन की सांठगांठ साफ उजागर हो गई है। अपर सिविल जज कोर्ट के आदेश और पूर्व की तमाम कार्रवाई के साथ इस प्रकरण को लेकर फिर से हाईकोर्ट में रिट दायर की जायेगी।
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वर्जन....
प्रकरण की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। जिस स्तर पर भी लापरवाही हुई है, उसे दिखवाया जायेगा। कार्रवाई तय कराई जाएगी। -अनिल ढींगरा, डीएम मेरठ
एमडीए की टीम ने कांप्लेक्स के शटर का ताला खुलवाकर भीतर निरीक्षण किया। वहां कोई निर्माण होता नहीं पाया गया, लेकिन यह सही है कि बिल्डर ने शटर लगा दिया है। उसकी मंशा सही प्रतीत नहीं हो रही है। हालांकि बिल्डर का कहना है कि भीतर का भवन क्षतिग्रस्त अवस्था में है, किसी भी हादसे को रोकने के लिए उसने शटर लगवाकर उसे बंद किया है। -राजकुमार, सचिव एमडीए
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