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फाइलों में कैद अवैध निर्माण का खेल

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08 हजार से ज्यादा अवैध निर्माण शहरी क्षेत्र में
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- एमडीए वीसी ने की समीक्षा तो असलियत आई सामने
- वीसी ने कहा, अवैध निर्माणों पर क्या-क्या हुआ एक्शन, दें रिपोर्ट
- शुल्क जुटाने को नए सिरे से चिह्नित हो रहे हैं निर्माण
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। शहर में आठ हजार से ज्यादा निर्माण ऐसे हैं, जिन पर कार्रवाई केवल फाइलों में कैद है। इनके चालान से लेकर सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई बस फाइलों में ही है। जहां धड़ल्ले से अवैध निर्माण हो रहे हैं तो ऐसी फाइलों की संख्या बढ़ती जा रही है। एमडीए वीसी राजेश कुमार पांडेय ने सभी जोनल प्रभारियों से जवाब तलब किया है। पूछा है कि वास्तव में कार्रवाई हुई है तो रिपोर्ट दी जाए।
चारों जोन में हाल बुरा
मेरठ विकास प्राधिकरण का कार्य क्षेत्र चार जोन में बांटा गया है। सभी के जोनल अधिकारी बनाए गए हैं तो नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए गए हैं। अवर अभियंता और मेट भी प्रत्येक क्षेत्र में अलग-अलग तैनात किए गए हैं। इस पूरी टीम का काम केवल यही है कि वह अवैध निर्माण की न केवल तत्काल सूचना दें बल्कि उस पर प्रभावी कार्रवाई भी कराएं। इतनी बड़ी टीम ने ऐसे निर्माणों पर अंकुश लगाने की बजाय उन्हें बढ़ावा दिया। शहर के सभी जोन में अवैध निर्माण होते रहे।
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केवल फाइलों का पेट भरा
एमडीए के जोनल अधिकारियों ने केवल फाइलों का पेट भरा। खुद को सुरक्षित करने के लिए भी फाइलों में सारी कार्रवाई की गई क्योंकि यदि मामला खुले और पूछा जाए कि क्या एक्शन लिया तो पूरी फाइल पेश कर दी जाए। इसमें चालान भी काटे गए हैं। सीलिंग की डेट भी तय है और यहां तक की काफी फाइलों में ध्वस्तीकरण की तारीख भी तय कर नोटिस लगाया गया है। फाइलों में यह शो किया गया है कि पुलिस बल उपलब्ध न होने के कारण एक्शन नहीं हो पाया।
बदस्तूर जारी हैं अवैध निर्माण
चाहे ईव्ज चौराहे पर बना बड़ा कांप्लेक्स हो या भगत सिंह मार्केट का कांप्लेक्स या फिर खैरनगर जैसे सघन इलाके में अवैध दुकानें, लगातार निर्माण होता रहा है और एमडीए केवल फाइलों में ही खेल करता रहा। सबसे बड़ा उदाहरण तो व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का है। आवासीय को भी यदि छोड़ दिया जाए तो इनमें आधे से ज्यादा निर्माण तो व्यावसायिक हैं।
बाद में फंसे खरीददार
कई मामलों में बिल्डरों ने अवैध निर्माण करा दिए। दुकानें और मकान बनाकर बेच डाले और फिर निकल गए। फंसे खरीददार। अब उन्हें नोटिस जारी हो भी रहे हैं तो वे दुहाई दे रहे है कि बिल्डरों ने धोखा दिया है। बागपत रोड पर एक बड़ी मार्केट इसका बड़ा उदाहरण है। परतापुर में भी ओवरब्रिज के नीच की मार्केट में यही हुआ। खैरनगर में बने अवैध कांप्लेक्स में भी दुकानें बिक गई हैं। ऐसे में अब यदि फंसे तो खरीददार ही फंसेंगे।
शुल्क पर जोर, ध्वस्तीकरण तो होने से रहा
एमडीए अब दूसरी योजना पर काम करने जा रहा है। इतनी बड़ी संख्या में अवैध निर्माणों का ध्वस्तीकरण तो होने से रहा। ऐसे में योजना यह है कि जो प्रकरण समायोजित करने योग्य हैं, उनका समायोजन कर दिया जाए। शमन शुल्क वसूल लिया जाए। इससे राजस्व भी बढ़ेगा और निर्माण वैध भी ही जाएंगे।
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एक्शन के साथ समायोजन
अवैध निर्माणों पर एक्शन होगा। लेकिन जो मामले शमन योग्य हैं, उनका समायोजन करने को भी कहा गया है। खास यह भी है कि यह पहले देख लिया जाएगा कि मामला समायोजन योग्य है या नहीं। तभी शमन शुल्क जमा कराया जाएगा। -राजेश कुमार पांडेय, वीसी एमडीए
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