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परिचालक छीन रहे यात्रियों के बीमे का हक

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रोडवेज यात्रियों से प्रति टिकट वसूलता है बीमा अधिभार, 30 लाख प्रतिमाह की कमाई
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यात्रियों से पैसा वसूलकर परिचालक नहीं देते टिकट
एक्सीडेंट होने की स्थिति में यात्री नहीं कर सकता बीमे का दावा

राजदीप जाखड़

मेरठ। रोडवेज परिचालकों की पैसा कमाने की भूख यात्रियों पर भारी पड़ सकती है। बस दुर्घटनाग्रस्त होने की स्थिति में बिना टिकट यात्रियों को बीमे का लाभ नहीं मिलता है। यानि परिचालकों की यह मनमानी यात्रियों का हक छीन रही है। रोडवेज एमडी ने मामले का संज्ञान लेकर डब्लूटी (विदाउट टिकट) रोकने के सख्त आदेश जारी किए हैं।
यात्रियों के सुरक्षित सफर के लिए रोडवेज प्रति टिकट 50 पैसे से लेकर तीन रुपये तक बीमा अधिभार वसूलता है। अगर बस दुर्घटना में किसी यात्री के साथ अनहोनी हो जाती है तो रोडवेज यात्री दुर्घटना बीमा निधि से उक्त यात्री को क्लेम देता है। लेकिन ये क्लेम उसी यात्री को मिलता है जिसके पास टिकट होता है। मेरठ रोडवेज रीजन के आंकड़ों पर नजर डालें तो यात्री बीमे से हर महीने करीब 30 लाख की धनराशि विभाग के खाते में जा रही है। परिचालक यात्रियों से पैसा तो वसूल लेते हैं, लेकिन टिकट नहीं देते हैं। ऐसे में इन यात्रियों को बीमे का लाभ नहीं मिल सकता है।
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ये हैं प्रति टिकट बीमा अधिभार
किलोमीटर बीमा अधिभार
0-85 50 पैसे
86-100 1 रुपया
101-200 2 रुपये
201 से ऊपर 3 रुपये

डब्लूटी रोकने के आदेश
रोडवेज एमडी पी. गुरू प्रसाद ने यात्री बीमे का संज्ञान लेते हुए सभी आरएम को क्षेत्र में डब्लूटी रोकने और डब्लटी करने वाले परिचालकों पर सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। ऐसा उन्होंने प्रदेश में हुई रोडवेज बस दुर्घटना में क्लेम के मामलों में यात्रियों के पास टिकट नहीं होने की शिकायत पर किया है। बताया गया है कि बाराबंकी, अलीगढ़, हमीरपुर आदि में ऐसे केस मिले हैं जिनमें डब्लूटी के मामले सामने आए हैं।
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30 लाख प्रतिमाह जाते है रोडवेज के खाते में
रोडवेज यात्रियों से प्रति टिकट 50 पैसे से लेकर तीन रुपये तक वसूले जाते है। रीजन की बसों से प्रतिदिन करीब 50 हजार यात्री सफर करते हैं। अगर औसत बीमा राशि प्रति टिकट 2 रुपये माने तो रोजाना एक लाख रुपये और महीने में 30 लाख रुपये विभाग के खाते में जा रहे हैं।
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