28 करोड़ रुपये का किया गया बजट में इलेक्ट्रिक मशीन का प्रावधान
260-260 मीटर की पटरियां तैयार कर भेजी जाएंगी देश के कई हिस्सों में
- मेरठ कैंट स्थित बट वेल्डिंग प्लांट में लगेगी 1-2 माह में वेल्डिंग इलेक्ट्रिक मशीन
- एक जेनरेटर मशीन से ही पटरियां हो रही तैयार, दूसरी लगने पर काम होगा तेज
दीपक भारद्वाज
मेरठ। रेल यात्रियों को सुरक्षित सफर की गारंटी देने के लिए रेलवे की तरफ से ठोस कदम उठाने शुरू हो गए हैं। इसके लिए रेलवे ने पटरियों को तेजी से बदलने का संकल्प लिया है। इस कार्य में तेजी लाने के लिए कैंट स्थित बट वेल्डिंग प्लांट में अगले एक-दो माह तक नई इलेक्ट्रिक मशीन लगाने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। मेरठ से पटरियों को तैयार कर देश के विभिन्न हिस्सों में बिछाने के लिए भेजा जाएगा।
अब हो जाएंगी दो मशीनें
बट वेल्डिंग प्लांट में इलेेक्ट्रिक मशीन के लिए बजट में 28 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह नई मशीन विदेश से आनी है। जिसके जरिए पटरियां तेजी से तैयार होंगी। अभी प्लांट में जनरेटर मशीन से ही पटरियां तैयार हो रही हैं। प्लांट में वर्तमान में लगी हॉलैंड कंपनी की मशीन का टेंडर अगले महीने समाप्त हो जाएगा। इसके बाद इसका टेंडर निकालकर मशीन लगाई जाएगी। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक मशीन को भी लगाया जाना है। हाल में चल रही मशीन की कीमत पांच करोड़ के आसपास है। प्लांट में दो मशीनों के लगने के बाद यहां कार्य में तेजी आ जाएगी। अभी रेलवे की मांग के अनुसार कार्य धीमी गति से चलने से पटरियों को बदलने में परेशानी आ रही हैं।
जिंदल स्टील का मिला सहारा
पहले भिलाई से पटरी के 26 मीटर के टुकड़े आते थे। लेकिन जिंदल स्टील से भी सप्लाई शुरू हो जाने के बाद अब तेजी से पटरी के टुकड़े भेजे जाते हैं। इन 26 मीटर के टुकड़े में 9 जोड़ लगाकर 260 मीटर की एक पटरी तैयार की जाती है।
तीन हजार जोड़ लगाने का लक्ष्य
प्लांट के सीनियर सेक्शन अधिकारियों के मुताबिक रेलवे की ओर से अभी एक दिन में तीन हजार जोड़ लगाने का लक्ष्य तय है। लेकिन मशीन की कमी की वजह से अभी सिर्फ रोजाना 1200-1500 जोड़ ही रोजाना लगाए जाते हैं। मशीनों के लगने के बाद लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा।
यहां भेजी जाती हैं पटरियां
प्लांट से पटरियों को पंजाब, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, वाराणसी, लखनऊ, हिमाचल आदि क्षेत्रों में भेजा जाता है। एक बार में मालगाड़ी में 260 मीटर लंबाई की 48 पटरियां जाती हैं।
खास बातें:
एक पटरी मानी जाती है - 260 मीटर
एक मशीन की कीमत - 5 करोड़ के आसपास
भिलाई और जिंदल स्टील भेजती है
26-26 मीटर के टुकड़े