- महानगर में सरकारी जमीनों पर बड़े पैमाने पर हैं अवैध कब्जे
- देहात क्षेत्र में कब्जे हटवाए लेकिन महानगर में एक इंच भी भूमि नहीं करा सके कब्जामुक्त
मेरठ। प्रदेश में योगी सरकार को 22 माह हो चुके हैं। मुख्यमंत्री बनते ही योगी आदित्यनाथ ने भूमाफियाओं पर शिकंजा कसने के लिए एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स का गठन करते हुए सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त कराने और भूमाफियाओं पर कार्रवाई के आदेश दिए थे। मेरठ में देहात क्षेत्र में तो कई जगह सरकारी जमीनों से कब्जे हटवाए गए। लेकिन महानगर क्षेत्र में तमाम अवैध कब्जे आज भी बरकरार हैं। जिला प्रशासन शहर में एक इंच भी जमीन कब्जा मुक्त नहीं करा पाया है।
एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स गठन के बाद सबसे बेहतर काम वन विभाग ने किया था। खादर क्षेत्र सहित अन्य जगहों पर जहां भी वन विभाग की जमीनों पर कब्जे थे, उसमें अधिकांश को कब्जा मुक्त कराया गया। इसके अलावा जिला पंचायत व अन्य विभागों की जमीन भी देहात क्षेत्र में कब्जा मुक्त कराई गई। लेकिन शहरी क्षेत्र में भूमाफियाओं पर शिकंजा नहीं कसा जा सका। हापुड़ अड्डा चौराहा स्थित नजूल की जमीन पर बने अवैध कांप्लेक्स को एमडीए ने तो नक्शा स्वीकृत न होने पर ध्वस्त करा दिया। लेकिन प्रशासन आज तक भी इस जमीन पर कब्जा नहीं ले पाया है। इसके अलावा ईव्ज चौराहा के पास बना कांप्लेक्स हो या फिर गंगानगर क्षेत्र में सिंचाई विभाग की जमीन हो। सभी आज भी भूमाफियाओं के कब्जे में है। इसके अलावा एनएच-58 पर कई कॉलोनियां और शिक्षण संस्थान निर्माण में सरकारी जमीन पर कब्जा किया गया। लेकिन इनको भी कब्जा मुक्त नहीं कराया जा सका।
शहर के बीच में भी घंटाघर स्थित एसपी सिटी कार्यालय से आगे डीएन कालेज तक नजूल की जमीन पर निर्माण है। मेनका सिनेमा भी नजूल की जमीन में था। लेकिन इस मामले में कार्रवाई तो दूर आज तक प्रशासन इसकी पैमाइश तक नहीं करा पाया है। ऐसे तमाम मामले शहर के हैं, जिन्हें लेकर प्रशासन चुप्पी साधे बैठा है।
आईएएस वीक में गूंजा मामला
लखनऊ में आईएएस वीक के दौरान तीन दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐसे ही तमाम अभियानों पर आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि उनके पास तमाम जानकारी हैं कि किसने कितना काम किया है। किसी भी दबाव को नकारते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वोट उन्हें लेनी है तो आईएएस अधिकारी क्यों कार्रवाई से कतरा रहे हैं। योगी के तेवर देख अधिकारी फिर से सक्रिय हो गए हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार एक बार फिर से तमाम सरकारी जमीनों का रिकार्ड खंगालते हुए भूमाफियाओं की कुंडली खंगाली जा रही है। माना जा रहा है कि जल्दी ही कुछ मामलों में प्रशासन स्तर से कार्रवाई तय हो सकती है।