अधिवेशन के बाद प्रदेश मंत्री मंडल में बदलाव तय
मेरठ।
आगरा अधिवेशन कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। इसमें एक तरफ जहां राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह लोकसभा चुनाव के लिए यूपी की महत्ता बता गये, वहीं लोकसभा चुनावी की तैयारी के मद्देनजर पश्चिमी क्षेत्र सहित तीन क्षेत्रों की रिपोर्ट भी तलब करके ले गये। इस रिपोर्ट के बाद यूपी में कई परिवर्तन के संकेत को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
लोकसभा चुनाव में केंद्र की सरकार बनाने में यूपी अहम भूमिका निभाता आ रहा है। ऐसे में इस बार भी उत्तर प्रदेश पर ही पूरी तरह नजर होगी। लेकिन वर्तमान में जो स्थिति भाजपा की है, वह चिंताजनक है। एक तरफ जहां भाजपा की जो लहर 2017 तक नजर आ रही थी, वह अब थमती नजर आ रही है, तो दूसरी तरफ महागठबंधन ने उपचुनाव के नतीजों के बाद भाजपा नेतृत्व की नींद उड़ा दी है।
भाजपा आज जिस स्थिति में हैं, उसके पीछे कहीं न कहीं उसके सांसदों और विधायकों की निष्क्रियता, जनता के बीच संवादहीनता, मंत्रियों की कार्य प्रणाली और संगठन में चल रही आपसी खींचतान है। इसके अलावा दूसरे दलों से आने वाले नेताओं को पुराने निष्ठावान कार्यकर्ताओं पर वरीयता देने से कार्यकर्ता आहत हैं। जिस कारण लगातार पार्टी का ग्राफ नीचे गिर रहा है।
अमित शाह ने आगरा के अधिवेशन में विस्तारकों से इसी बात पर चर्चा की और रिपोर्ट प्राप्त की। अधिवेशन के बाद जहां पश्चिमी क्षेत्र के छह सांसदों को इस बार टिकट न मिलना तय माना जा रहा है, तो इस बात को लेकर भी पूरी चर्चा है कि शीघ्र ही क्रियाशील विधायकों को जहां मंत्री मंडल में जगह दी जाएगी, वही कुछ मंत्रियों को हटाया जाएगा। इसके अलावा मंत्री मंडल का भी विस्तार किया जाएगा। लेकिन इस मंत्री मंडल में अब मेरठ के वर्तमान हालात को देखते हुए मेरठ के किसी विधायक के शामिल होने की उम्मीद बहुत कम जताई जा रही है।