नशे से कमा रहे अरबों, नशा मुक्ति पर खर्च लाखों
मेरठ।
मद्यनिषेध विभाग लोगों को नशे के दुष्परिणाम और उससे दूर रहने के लिए काम करता है। मेरठ में यह विभाग साकेत में संचालित है, जिसे केंद्र सरकार से अनुदान प्राप्त होता है। लेकिन एक तरफ जहां नशे की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। वहीं इस नशे को रोकने के लिए जनजागरण करने को सरकारी बजट बहुत कम है। जबकि दूसरी तरफ आबकारी विभाग प्रदेश में ही एक साल में अरबों रुपये राजस्व कमाता है।
मिशन कंपाउंड निवासी मनोज चौधरी ने क्षेत्रीय मद्य निषेध एवं समाजोत्थान अधिकारी के यहां से आरटीआई में कई सूचनाएं मांगी थीं। जिसके जवाब में जहां प्रचार प्रसार पर बहुत कम खर्च नजर आया है, तो अन्य जवाब बहुत चौंकाने वाले रहे।
विभागीय अधिकारी ने आरटीआई में जवाब देते हुए बताया कि विभाग द्वारा नशे के दुष्परिणाम और नशा छोड़ने के लिए प्रचार प्रसार किया जाता है। इस दौरान लोगों को नशा न करने के लिए प्रेरित किया जाता है। विभाग ने प्रचार प्रसार के लिए वर्ष 2013-14 में 196429, वर्ष 2014-15 में 197858 रुपये खर्च किए। इसके अलावा वर्ष 2015-16 में दो लाख रुपये और वर्ष 2016-17 में 2,14,285 रुपये खर्च किये। जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में विभाग ने 203106 रुपये खर्च किए।
नहीं है कोई आंकड़ा
मद्यनिषेध विभाग सिर्फ प्रचार प्रसार का काम करता है। विभागीय अधिकारी के अनुसार नशाखोरी में कितनी वृद्धि हुई, मेरठ में कहां पूरी तरह मद्यनिषेध क्षेत्र है, नशाखोरी में कितने लोग पकड़े गए आदि के मामलों का उनके पास कोई आंकड़ा नहीं है।