गठबंधन के दांव पर सबका अपना दावा
शामली।
गोरखपुर और फ ूलपुर उप चुनाव में सपा- बसपा गठबंधन दांव सफल होने के बाद कैराना उप चुनाव में भी विपक्ष यही फार्मूला आजमाने की तैयारी में है। तब वहां कांग्रेस गठबंधन से अलग रही थी, लेकिन यहां कांग्रेस और रालोद की कोशिश भी इस गठबंधन में शामिल होकर महा गठबंधन का रूप देने की है। लेकिन साथ ही चुनाव कौन सा दल लड़े इस पर पेच फंसा है। पिछले दो विधान सभा उपचुनाव और लोकसभा चुनाव में मिले वोटों के आधार पर सपा, कांग्रेस और रालोद दावा जता रहे हैं। बसपा फिलहाल इस होड़ से दूर है, लेकिन निर्णय काफी हद तक उसी का रुख तय करेगा।
दरअसल, सपा इस सीट पर अपनी दावेदारी इसलिए भी पेश कर रही है, 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के दौरान सपा प्रत्याशी को सवा तीन लाख वोट मिले थे और बसपा प्रत्याशी को करीब डेढ़ लाख वोट मिले थे। गोरखपुर और फूलपुर सीट के उपचुनाव के बाद सपा और बसपा में गठबंधन हो चुका है, जिसके चलते सपा अपनी स्थिति मजबूत मान रही है। इस सीट के इतिहास को खंगाला जाए, तो दो बार कांग्रेस प्रत्याशी सांसद बना, तो दो बार रालोद ने चुनाव जीता है। इस लिहाज से रालोद और कांग्रेस नेता भी अपनी दावेदारी मजबूत बता रहे हैं। यही वजह है कि महागठबंधन में कैराना लोकसभा सीट पर यह तय नहीं हो पा रहा है कि महागठबंधन होता है, तो सीट किसके खाते में रहेगी।
आंकलन सिर्फ लोकसभा चुनाव के नतीजों को लेकर ही नहीं, बल्कि 2012 और 2017 में हुए विधानसभा चुनाव को लेकर भी किया जा रहा है। उसमें विपक्षी दलों के नेता खुद की मजबूती का तर्क दे रहे हैं। 2012 के विधानसभा चुनाव में कैराना सीट भाजपा ने जीती थी, लेकिन 60750 वोट लेकर बसपा प्रत्याशी हाजी अनवर हसन दूसरे नंबर पर रहे थे। थानाभवन सीट भी भाजपा ने जीती थी, लेकिन 53454 वोट लेकर रालोद प्रत्याशी अशरफ अली दूसरे नंबर पर थे। इसी तरह शामली सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी पंकज मलिक ने 53947 लेकर जीत दर्ज की थी, तो सपा प्रत्याशी वीरेंद्र सिंह 50206 वोट लेकर दूसरे नंबर पर रहे थे।
-- कैराना लोकसभा सीट पर अब तक हुए 13 चुनाव
इस लोकसभा सीट पर अब तक हुए 13 चुनावों में भाजपा ने सिर्फ दो बार जीत दर्ज की। 1998 में भाजपा के टिकट पर पूर्व राज्यपाल वीरेंद्र वर्मा चुनाव जीते थे, तो 2014 में हुकुम सिंह ने जीत दर्ज की थी। इसके अलावा 2009 में बसपा से तबस्सुम हसन, 2004 में रालोद से अनुराधा चौधरी, 1999 में रालोद से अमीर आलम, 1996 में सपा से मुनव्वर हसन, 1989 और 1991 में जनता दल से हरपाल पंवार, 1984 में कांग्रेस से अख्तर हसन, 1980 में जनता पार्टी (एस) से गायत्री देवी, 1977 में बीएलडी से चंदन सिंह, 1971 में कांग्रेस से शफक्कत जंग और 1967 में सोशलिस्ट पार्टी से गय्यूर अली खान सांसद बने थे।
लोकसभा चुनाव 2014
---प्रत्याशी ---- पार्टी ------- मिले वोट------ प्रतिशत
हुकुम सिंह ---- भाजपा ------ 656909-------- 50.54
नाहिद हसन----सपा ---------329081--------- 29.49
कंवर हसन ----बसपा--------160414-------- 14.33
करतार भड़ाना---रालोद -------42706---------- 3.81
कैराना, नूरपुर उपचुनाव के लिए
रालोद ने नियुक्त किए प्रभारी
लखनऊ। राष्ट्रीय लोकदल ने कैराना लोकसभा व नूरपुर विधानसभा उपचुनाव के मद्देनजर संगठनात्मक मजबूती के लिए विधानसभावार प्रभारी नियुक्ति किए हैं। सभी प्रभारियों की नियुक्ति राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह के निर्देश पर प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मसूद अहमद ने की है।
रालोद के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल दुबे ने बताया कि पूर्व विधायक शहनवाज राणा को गंगोह, राममेहर सिंह गुर्जर को कैराना, पूर्व विधायक शिवकरन सिंह को थानाभवन, पूर्व मंत्री योगराज सिंह को शामली, पूर्व विधायक नवाजिश आलम को नकुड तथा पूर्व विधायक अशफाक अली खान को नूरपुर का प्रभारी नियुक्त किया गया हैं। सभी प्रभारी अपने विधानसभा क्षेत्रों में पहुंचकर संगठन की मजबूती व उपचुनाव में अपनी भूमिका का निर्वहन करेंगे।