मेरठ। ऐसे कामर्शियल भवन जो अभी भी आवासीय टैक्स दे रहे हैं, अब ज्योग्रॉफी इनफोर्मेसन सिस्टम (जीआईएस) की गिरफ्त में होंगे। इनसे कामर्शियल टैक्स वसूला जाएगा। जिन भवन स्वामियों ने निगम अधिकारियों से सांठगांठ करके अपना हाउस टैक्स कम कराया हुआ है वह भी पकड़े जाएंगे। यह कार्रवाई नगर निगम ने एक संस्था के सहयोग से शुरू कर दी है।
अभी तक नगर निगम को महानगर से 30 करोड़ रुपये हाउस टैक्स प्राप्त हो रहा है। शहर में काफी प्रॉपर्टी ऐसी हैं जिनमें कामर्शियल यानी कारोबार हो रहा है, लेकिन टैक्स आवासीय ही लगा है। इतना ही नहीं काफी प्रॉपर्टी अभी टैक्स से दूर हैं। ऐसे सभी कामर्शियल भवनों पर शिकंजा कसने के लिए नगर निगम ने कार्रवाई शुरू कर दी है। केंद्र सरकार ने नगर निगम का राजस्व बढ़ाने के लिए वर्ल्ड बैंक के माध्यम से एक संस्था को मेरठ भेजा है। 31 मार्च तक संस्था को महानगर की सीमा में जीआईएस सर्वे करके एक-एक कामर्शियल भवन का लेखाजोखा तैयार करना है, ताकी आगामी वित्तीय वर्ष में नगर निगम सभी छूटे भवनों पर हाउस टैक्स लगाकर वसूली शुरू कर सके। जीआईएस सर्वे के दौरान भवन की तस्वीर भी कैमरे में कैद होगी। भवन स्वामी झूठ बोलकर टैक्स से बच नहीं पाएगा। मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी संतोष शर्मा का कहना है कि सरकार द्वारा संस्था को कार्य सौंपा गया है। निगम प्रशासन के साथ संस्था की बैठक हो चुकी है। नगर निगम को 30 से 40 करोड़ रुपये अधिक की आय बढ़ेगी।