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कहां गई फाइल

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कहां गई निर्माण निगम के घोटाले की फाइल
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मेरठ। उप्र राजकीय निर्माण निगम के मकानों में हुए 125 करोड़ के घोटाले पर बैठी जांच अभी एक कदम भी नहीं चल पायी है। जांच टीम को निर्माण निगम के अधिकारियों ने फाइल ही नहीं सौंपी है। यानी पूरी तरह से जांच को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। सूत्रों का यह भी कहना है कि निर्माण निगम के अधिकारी लखनऊ में सरकारी मशीनरी में सांठगांठ में लगे हैं। अब से पहले भी इसी तरह जांच को प्रभावित किया जा चुका है।
बसपा सरकार के कार्यकाल में उप्र राजकीय निर्माण निगम द्वारा गरीबों के लिए आवास योजना शुरू की गयी थी। उसी समय से योजना को भ्रष्टाचार की दीमक लग गयी थी। यूपी में योगी सरकार आते ही पुरानी सभी योजनाओं पर जांच बैठी तो जिला प्रशासन ने उप्र राजकीय निर्माण निगम के अधिकारियों ने 425 करोड़ की योजना में खर्च रुपये और भवनों का रिकार्ड मांग लिया। जिला प्रशासन के पत्रों को निर्माण निगम के अधिकारियों ने रददी की टोकरी दिखा दी।
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पूरे मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया। मामले की गूंज उप्र सरकार तक पहुंची। शासन ने पूरा संज्ञान लिया है। उसके बाद जिलाधिकारी समीर वर्मा ने शासन के निर्देश पर 425 करोड़ की आवास योजना पर जांच बैठा दी। जांच टीम में एसडीएम सदर, आवास विकास के सहायक अभियंता देवेन्द्र प्रताप, नगर निगम के जूनियर इंजीनियर एसपी सिंह को शामिल किया गया। जांच कमेटी गठित हुए एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक जांच शुरू भी नहीं हो सकी है। कारण बताया जा रहा है कि उप्र राजकीय निर्माण निगम के अधिकारी जांच टीम को रिकार्ड देने को तैयार नहीं हैं।
समेटा जा रहा है सूरजकुंड से सामान
मेरठ। उप्र राजकीय निर्माण निगम का कार्यालय सूरजकुंड पर डूडा कार्यालय के ऊपर संचालित है। पिछले कई साल से निर्माण निगम के अधिकारी मेरठ में इस कार्यालय के बजाय रुड़की स्थित कार्यालय में बैठते हैं। जनपद में निर्माण निगम द्वारा कराए गए निर्माण कार्यों का लेखाजोखा भी समेटकर रुड़की ले जाया जा रहा है। यानी घोटाले को दबाने के लिए रिकार्ड को खुर्दबुर्द करने की तैयारी है।
- उप्र राजकीय निर्माण निगम का कार्यालय रुड़की चला गया है। अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया है लेकिन न तो रिकार्ड उपलब्ध कराया जा रहा है और न ही कोई संतुष्ट जवाब मिल रहा है। अब डूडा से जांच में सहयोग की बात हो रही है। अगर डूडा जारी धन का रिकार्ड दे तो जांच को कुछ आगे बढ़ाया जा सकता है।
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संतोष बहादुर, एसडीएम सदर।
- हम अनेकों बार पत्र लिखकर निर्माण निगम के अधिकारियों से रिकार्ड मांग चुके हैं। अगर हमें रिकार्ड मिल जाता तो जांच टीम को जरूर उपलब्ध कराया जाता। इसकी सूचना डूडा की तरफ से शासन को भी भेजी जा चुकी है।
आरपी सिंह, परियोजना अधिकारी डूडा।
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