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सीसीएसयू कैंपस में टीचिंग को असिस्टेंट का सहारा

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सीसीएसयू कैंपस में टीचिंग को असिस्टेंट का सहारा
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मेरठ। सीसीएसयू कैंपस में टीचिंग को टीचिंग असिस्टेंट का सहारा है। आंकड़े यह बात बया करते हैं। कैंपस में 105 टीचिंग असिस्टेंट हैं और 55 रेग्युलर शिक्षक। टीचिंग असिस्टेंट रेग्युलर और सेल्फ फाइनेंस दोनों पढ़ा रहे हैं। सोमवार से टीचिंग असिस्टेंट के लिए इंटरव्यू शुरू हुए हैं। अहम बात यह है कि टीचिंग असिस्टेंट को लेकर विश्वविद्यालय की पॉलिसी एक नहीं है। वेतन कहीं कम है तो कहीं ज्यादा। अंदर खाने इसका विरोध है।
विश्वविद्यालय में सोमवार से टीचिंग असिस्टेंट के पद के लिए इंटरव्यू शुरू हुए हैं। राजनीति विज्ञान, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, बॉटनी, जूलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी विभाग के लिए इंटरव्यू हुए। रेग्युलर फैकल्टी से अधिक कैंपस में टीचिंग असिस्टेंट हैं। 20 रेग्युलर विभागों में 55 रेग्युलर शिक्षक हैं। छात्रों की संख्या कैंपस में करीब तीन हजार है। सर छोटूराम इंस्टीट्यूट, जिसमें बीटेक की पढ़ाई होती है, करीब 60 टीचिंग असिस्टेंट रखे गए थे। इनमें काफी को विवि ने पदनाम दिए हैं। कैंपस में एक दर्जन से अधिक सेल्फ फाइनेंस कोर्स चल रहे हैं। वह टीचिंग असिस्टेंट के दम पर चल रहे हैं। कुछ कोर्स अच्छा कर रहे हैं तो कई बंद हो चुके हैं।
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पदनाम का चक्कर
टीचिंग असिस्टेंट के कैंपस में दो वर्ग हैं। कुछ को विवि ने असिस्टेंट प्रोफेसर का पदनाम दे दिया है। सर छोटूराम इंस्टीट्यूट के काफी शिक्षकों को असिस्टेंट प्रोफेसर का पदनाम दिया गया है। लॉ और एमबीए में असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसर का पदनाम दिया गया है। कुछ कोर्स में सिर्फ टीचिंग असिस्टेंट पद चला आ रहा है।
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कुछ सेटिंग से कुछ मेहरबानी पर
टीचिंग असिस्टेंट में ऐसे भी केस हैं जो सालों से सेटिंग और मेहरबानी की वजह से चलते आ रहे हैं। 11 महीने बाद अगले साल के लिए उनका रिन्यूवल हो जाता है। यह अधिकांश पीएचडी पासआउट हैं। जो यूजीसी के रेग्युलेशन 2009 से पहले पीएचडी कर चुके हैं।
खास बात
विश्वविद्यालय कैंपस में टीचिंग असिस्टेंट के इंटरव्यू शुरू
105 टीचिंग असिस्टेंट हैं, 20 विभागों में 55 हैं रेग्युलर शिक्षक
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