- ऊर्जा भवन पर बुधवार को धरना प्रदर्शन कर भाकियू ने किया था गांवों में मीटर लगाने का विरोध
- एमडी ने मांग पत्र शासन को भेजने का दिया था आश्वासन
राजदीप जाखड़
मेरठ।
ऊर्जा भवन पर भाकियू के सफल आंदोलन से ग्रामीणों को टॉनिक मिल गया है। ग्रामीणों ने भाकियू का नाम लेकर मीटर लगा रही टीमों को बाहर करना शुरू कर दिया है। लोगों का कहना है भाकियू से हुई अधिकारियों की बातचीत में मीटर लगाने का मामला शासन के पास भेजा गया है। अगले आदेश तक वे मीटर नहीं लगने देंगे।
यूपीपीसीएल द्वारा उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग के पास ग्रामीण बिजली दरों में 400 फीसदी तक की वृद्धि के प्रस्ताव भेजने से ग्रामीणों में भारी रोष उत्पन्न हो गया। बिजली दरों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव और गांवों में लगाए जा रहे मीटर के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन को बैठे बिठाए ही बड़ा मुद्दा हाथ लग गया है। इस गंभीर मसले पर भाकियू के तेवर गरम हो गए हैं। भाकियू नेताओं ने 30 अगस्त को प्रदेश की चारों विद्युत कंपनियों पीवीवीएनएल, दक्षिणांचल, पूर्वांचल और मध्यांचल पर एक साथ धरना-प्रदर्शन कर सीएम के नाम कंपनी एमडी को ज्ञापन सौंपा था। पीवीवीएनएल के मुख्यालय ऊर्जा भवन पर हुए धरने में राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत की उपस्थिति से कार्यकर्ताओं में इस कदर जोश बढ़ा कि शाम होते होते कार्यकर्ताओं ने अधिकारियों व कर्मचारियों को घेरना शुरू कर दिया। देर रात तक ऊर्जा भवन पर कब्जा करने और एमडी अभिषेक प्रकाश से मांगों पर सकारात्मक वार्ता के बाद ही किसान घर लौटे थे। संगठन के हंगामे और प्रदर्शन की खबर मीडिया में पढ़ने के बाद ग्रामीणों में जोश आ गया। इसकी बानगी उस समय देखने को मिली जब पश्चिमांचल के सहारनपुर व मेरठ मंडल के कई गांवों में मीटर लगा रहे लोगों को वहां से भगा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि भाकियू ने मीटर लगाने का विरोध किया और इसके लिए शासन के पास मांग ज्ञापन भी भिजवाया है। जब तक सरकार अपने इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं करेगी, तब तक मीटर नहीं लगने देंगे।
बिजली दर बढ़ी तो सड़क पर होगी आरपार
भाकियू के संजय दौरालिया और नवाब सिंह अहलावत ने बताया कि सरकार किसानों पर बिजली दरें बढ़ाकर उनका शोषण करना चाहती है। सरकार की हरी झंडी मिलने के बाद यूपीपीसीएल ने नियामक आयोग को बिजली दरें बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा है। किसान बढ़ी बिजली दरों और मीटर लगाने का विरोध हर स्तर पर करेंगे। अगर फैसला नहीं बदला गया तो सड़क पर उतरकर आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
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वर्जन.....
केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार किसानों के लिए चुनाव पूर्व किए वादे पूरे करने में फेल साबित हुई है। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू नहीं की जा रही है। ऊपर से बिजली दरों को बढ़ाने और मीटर लगाने का काम हो रहा है। भाकियू इसे बर्दाश्त नहीं करेगी। -चौ. राकेश टिकैत, राष्ट्रीय प्रवक्ता भाकियू