लाइब्रेरेरियन ने कार्यशाला में की दिल की बात, परेशानियों पर चर्चा हुई
सीसीएसयू के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग में हुई कार्यशाला
मेरठ। लाइब्रेरेरियन को सरकार ने टीचिंग का पदनाम तो दे दिया। लेकिन शिक्षण संस्थानों में स्थिति अभी बहुत ज्यादा बदली नहीं है। खासतौर पर कॉलेजों में अभी भी दोयम दर्जे का व्यवहार प्रिंसिपल द्वारा किया जा रहा है। टीचिंग पद मिलने के बाद लाइब्रेरेरियन क्लास ले रहे हैं। कई मायनों में वह शिक्षक से ज्यादा बेहतर हैं। किताबों की जानकारी से लेकर सूचना के दौर में वह अपडेट हैं।
यह बातें रविवार को सीसीएसयू के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में विभिन्न कॉलेजों से आए लाइब्रेरेरियन ने कही। उन्होंने अपने दिल की बात एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ साझा की। यूनाइटेड प्रोग्रेसिव लाइब्रेरी एसोसिएशन के महासचिव डॉ. पीके दीक्षित ने कहा पदनाम प्रवक्ता पुस्तकालय मिलने के बाद अब अन्य राज्य विश्वविद्यालयों में यह विषय शुरू करने की तैयारी चल रही है। नए सत्र में कई विश्वविद्यालयों में यह शुरू होने की उम्मीद है। उसके बाद तस्वीर बदलेगी। जल्द यह एकेडमिक्स में गिना जाएगा। नॉन एकेडमिक्स का टैग ज्यादा दिन लाइब्रेरी साइंस के साथ चलने वाला नहीं है। कई लाइब्रेरेरियन ने प्रिंसिपल द्वारा देर तक रुकने और अन्य मामलों को लेकर अपनी आवाज उठाई। विवि के लाइब्रेरेरियन डॉ. जमाल अहमद सिद्दीकी ने कहा सीसीएसयू ने नए सत्र से पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान को बीए में वैकल्पिक विषय में लागू कर दिया है। विषय को पढ़ाने के लिए प्रवक्ता पुस्तकालय को निर्देश दिया गया है। कार्यशाला में एसोसिएशन के सचिव डॉ. संजीव पंवार, कोषाध्यक्ष डॉ. देवोत्तम त्यागी, उपाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र कुमार मौजूद रहे।