27 जून इंटरनेशनल डायबिटीज डे
इलाज के साथ जागरूकता जरूरी
मेरठ। तेजी से बदलती जीवनशेली, तनाव, डिप्रेशन से होने वाली बीमारियों में से एक डायबिटीज भी है। इसको शुगर या मधुमेह के नाम से भी जानते हैं। मधुमेह रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। एक अनुमान के मुताबिक 12 फीसदी से अधिक लोगों को अभी तक ये बीमारी अपने शिंकजे में ले चुकी है। बड़ों के साथ बच्चों को भी ये बीमारी तेजी से घेर रही है। इस बीमारी से घबराने के बजाय जागरूकता की ज्यादा आवश्यकता है।
क्या है डायबिटीज
अग्न्याशय में इंसुलिन का स्त्राव कम हो जाने के कारण खून में शुगर लेवल बढ़ जाता है तो उस स्थिति को डायबिटीज या मधुमेह कहते हैं। इंसुलिन एक हार्मोन है जो पाचक ग्रन्थि द्वारा बनता है और जिसकी जरुरत भोजन को एनर्जी बदलने में होती है। इंसुलिन के बिना हमारा शरीर शुगर का मात्रा को कंट्रोल नहीं कर पाता. इस स्थिति में हमारे शरीर को भोजन से ऊर्जा लेने में काफी कठिनाई होती है। लगातार शुगर लेवल बढ़ा रहने से आंखों, मस्तिष्क, हृदय, धमनियां और गुर्दे को नुकसान पहुंच सकता है।
कैसे पता करें डायबिटीज
आरामदायक जीवन शैली, अनुवांशिक कारण, ज्यादा तनाव लेना, मोटापा, अधिक वजन, ज्यादा वसायुक्त पदार्थ लेने, दवाओं की अधिकता टाइप टू डायबिटीज के कारण माने जाते हैं। अत्याधिक भूख प्यास, कमजोरी, आलस्य, त्वचा पर खुजली, जख्म जल्दी ठीक ना होना, बार बार मूत्र, अनियमित हृदयगति, अंगों का सुन्न होना, नजर में धुंधलापन इसके लक्षण है। टाइप वन डायबिटीज जन्म से ही साथ होती है। अगर आपको ये लक्षण हैं अथवा सामान्य से वजन ज्यादा है या आपके माता पिता को डायबिटीज है तो आपको भी हो सकती है। इसके लिए आप अपने खून में शुगर की जांच कराएं। खाली पेट शुगर लेवल 70 से 100 के बीच है तो आप नार्मल है। शुगर लेवल 100 से 125 है तो डायबिटीज के बार्डरलाइन पर हैं, इससे अधिक है तो आपको डायबिटीज यानि मधुमेह है।
नीम हकीम नहीं, डाक्टर से मिलें
अगर आपको डायबिटीज है तो शर्तिया इलाज कराने वाले नीम हकीमों या सोशल साइट्स के फार्मूले के चक्कर में न पड़कर सीधे डाक्टर से संपर्क करें। जितनी अधिक इलाज में देरी होगी, आपको देरी का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। डाक्टर की देखरेख में थोड़ी सी सावधानी रखकर इस पर काबू पाया जा सकता है।
बॉक्स--दिनभर में 4 किमी पैदल चलना जरुरी
चिकित्सकों के अनुसार शुगर के मरीजों के लिए रोजाना 4 किमी की वॉक काफी है। सुबह जल्दी उठकर दौड़ने या बहुत पैदल चलना शुगर नियंत्रित करने के लिए जरुरी नहीं। अगर मरीज दिनभर में हर तीन घंटे पर थोड़ी देर चले वो ज्यादा फायदेमंद है। दिनभर में कई बार चलकर 4 किमी की संख्या पूरी कर लें तो इसी से डायबिटीज नियंत्रित रहेगी। प्रमुख बात शुगर के मरीजों को अधिक व्यायाम और दौड़ने से बचना चाहिए। क्योंकि डाइबिटीज के मरीजों में दिल की बीमारी की संभावनाएं 98 प्रतिशत तक होती हैं इसलिए अधिक व्यायाम और दौड़ना शरीर के लिए घातक है।
बॉक्स--फल भी बढ़ाते हैं शुगर
डाइबिटीज रोगी सप्ताह में एक बार एक या दो फांक कोई भी फल खाएं। पूरा सेब, अमरुद या अन्य फल कतई न लें। हर फल में अच्छी मात्रा में ग्लूकोज होता है जो रक्त में शुगर लेवल बढ़ाता है। खट्ठे फलों में भी शुगर होती है जो मधुमेह में घातक है।
वर्जन--
बाजार में मधुमेह रोगियों के लिए शुगरफ्री ड्रिंक्स, शुगर फ्री मिठाइयां, स्नैक्स और पैकेटबंद खाद्य सामग्री हैं। इनका सेवन शरीर के लिए घातक है। आर्टिफिशियल स्वीटनर लेने से इंटेस्टाइन के बैक्टीरिया बदल जाते हैं। बैक्टीरिया में बदलाव मेटाबॉलिक और पाचन क्रिया के लिए अच्छा नहीं। इससे गॉलब्लैडर के कैंसर होने का खतरा रहता है। शुगर फ्री के नाम पर एसपाटर्म टेबलेट आ रही हैं। इसमें शुगर नहीं बल्कि अमीनो एसिड होता है। आयुर्वेद की दवाओं का कोई सांइटिफिक प्रमाण नहीं है, इनके कई साइडइफेक्टस भी हो रहे हैं। कई बार इससे केस बिगड़ भी जाते हैं। -- डॉ. अमिताभ गौतम, वरिष्ठ फिजिशियन
आयुर्वेद का प्रयास है कि मधुमेह हो ही नहीं। प्रारंभ से ही खानपान और दिनचर्या को नियमित रखें। कई खानपान की चीजें औषधीय रूप में काम करती है। जामुन, क रेला, मैथी शुगर नियंत्रित करते हैं। इन्हें खाना बेहतर है। टाइप टू शुगर को नियंत्रित करने के लिए डाइवोकोन, जम्बूशिला के अलावा अन्य दवाएं है, जो मेडिकली टेस्टेड हैं जो असरकार साबित हो रही हैं। डॉ. ब्रजभूषण शर्मा, आयुर्वेदाचार्य
महत्वपूर्ण तथ्य
- तनाव, शीतल पेय पदार्थों, धूम्रपान, जंकफूड, अधिक कार्बोहाइड्रेट और मीठा खाने से बचें
- मोटे अनाज, सलाद खाएं। नियमित 7 से 8 घंटे की नींद, योग, हेल्दी लाइफ स्टाइल और पैदल चलने से लाभ
- इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के अनुसार यदि कमर का नाप पुरुषों में 90 सेंटीमीटर व महिलाओं में 80 सेंटीमीटर से अधिक होता है, तो मधुमेह का खतरा अधिक।
- मधुमेह की आशंका को दिनचर्या में बदलाव करके 58 फीसदी तक कम किया जा सकता है।
- 35 वर्ष के बाद वर्ष में एक बार खून की जांच और अन्य जांच जरूर कराएं
इनका कर सकते हैं इस्तेमाल
दो चपाती- 140
एक कटोरी दाल (तुवर दाल)- 100
दही एक कप - 60
दूध बिना मलाई का एक कप - 45
सेब 100 ग्राम- 56
पपीता 100 ग्राम -32
आडू 100 ग्राम - 52
मशरूम 100 ग्राम -18
प्याज 100 ग्राम -30
गाजर 100 ग्राम - 48
तरबूज 100 ग्राम- 16
उबला अंडा एक - 80
चाय बिना चीनी -30
ये चीजें हो सकती हैं खतरनाक
कोल्ड ड्रिंक (300 मिली)- 126
गुलाब जामुन/बर्फी (दो पीस)- 385
समोसे (दो पीस)- 300
पिज्जा विद चीज (दो पीस)- 500
आलू टिक्की (दो पीस)-300
पकौड़े (आठ पीस)- 340
पास्ता या नूडल्स (100 ग्राम) - 430
पनीर टिक्का (आठ पीस)- 350
एक प्लेट मसाला डोसा- 440
एक प्लेट सांभर-इडली- 290
एक प्लेट पाव-भाजी- 420
आलू चिप्स (10-12 पीस)- 110
चावल 100 ग्राम -325
एक केला- 100
परांठा एक पीस - 260
आम 100 ग्राम- 85
गोलगप्पे (4-6)-100
कितनी कैलोरी चाहिए
महिला - 2000 से 2200
पुरूष- 2400 से 2800
बिाक्स - नई दवाओं ने आसान किया मधुमेह का इलाज
डाइबिटीज के मरीजों का इलाज अब मुश्किल नहीं। डाइबिटीज का नाम सुनते ही लोगों के चेहरे पर तनाव का जो भाव आता है, उसे दूर करने क ी कई कारगर दवाएं चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में आ चुकी हैं। शुगर के मरीजों की बढ़ती संख्या के बाद दवाओं के कई नए समूह बाजार में हैं। जो वजन घटाए बिना शुगर नियंत्रित कर रहे हैं। शहर के चिकित्सक भी टाइप टू डायबिटीज में ये दवाएं मरीजों को दे रहे हैं। इसमें एसजीएल टी 2 इंहीबिटर्स (ग्लीफोजिंस) और जीपीएल 1 (ग्लूकागोन लाइक पेप्टाइड 1) प्रमुख हैं। ये दोनों समूह टाइप 2 डायबिटीज को नियंत्रित करने में कारगर साबित हो रहे हैं। बिना वजन बढ़ाए, नियंत्रित रक्तचाप और दिल को नुकसान पहुंचाए बगैर ये दोनों समूह काम कर रहे हैं।
एसजीएल टी 2--
सोडियम, ग्लूकोज को ट्रांसपोर्टर- 2 इंहीबिटर्स मधुमेह की ओरल दवाओं का एक नया समूह है। टाइप 2 डायबिटीज के इलाज में कारगर साबित हो रहा है। रोजाना एक गोली खाने के साथ ले सकते हैं। जो किडनी के माध्यम से रक्त के अतिरिक्त ग्लूकोज को यूरिन के माध्यम से बाहर करते हुए शुगर को नियंत्रित करता है।
जीपीएल 1 ----
जीपीएल 1 (ग्लूकागोन लाइक पेप्टाइड 1) उन मरीजों के लिए है जो टेबलेट के बाद भी शुगर नियंत्रित नहीं कर पाते। यह दवा रक्त से अतिरिक्त ग्लूकोज को बाहर निकालने का काम करती है। जीएलपी 1 एनॉलॉग इंजेक्शन और डीपीपी4 इंहीबिटर्स टेबलेट फॉर्म में मरीज को देते हैं। जो शरीर में इंक्रीटीन हार्मोन को सक्रिय करके इंसुलिन को सक्रिय बनाता है।