जांच के घेरे में आए परिचालक बने पीआरडी जवान
बागपत। पश्चिम यूपी के चार जिलों में परिचालक के पद पर नौकरी कर रहे पीआरडी के जवान जांच के दायरे में आ गए हैं। शिकायत की गई है कि जिन्हें पीआरडी के जवान बताकर भर्ती की गई है, उनमें अधिकतर पीआरडी के जवान ही नहीं थे। फर्जीवाड़े से उन्हें पीआरडी का जवान दर्शाया गया और इसके बाद परिचालक के पद पर नियुक्ति मिल गई। प्रांतीय रक्षक दल-विकास दल एवं युवा कल्याण उत्तर प्रदेश के महानिदेशक ने जांच के आदेश दिए हैं।
करीब ढाई साल पहले मेरठ सिटी ट्रांसपोर्ट में बागपत, गाजियाबाद, बुलंदशहर और हापुड़ जिलों के आवेदकों को परिचालक के पद पर नियुक्ति दी गई थी। मुजफ्फरनगर के रामपुर निवासी सुधीर शर्मा ने भर्ती में फर्जीवाड़े की शिकायत मुख्यमंत्री और पीआरडी मंत्री से की थी। शिकायतकर्ता के मुताबिक भर्ती में कई आवेदकों को फर्जी पीआरडी जवान दर्शाकर संविदा परिचालक बना दिया गया। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि 98 प्रतिशत नियुक्ति में गलत प्रमाणपत्र का प्रयोग किया गया है। प्रांतीय रक्षक दल-विकास दल एवं युवा कल्याण उत्तर प्रदेश के महानिदेशक ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जिलों के डीएम को निर्देशित किया कि जांच की जाए और रिपोर्ट मुख्यालय भेजें।
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बागपत से कर रहे 20-22 जवान नौकरी
बागपत। युवा कल्याण अधिकारी कृपाल सिंह ने बताया कि जिले में करीब 172 पीआरडी के जवान तैनात हैं। इनमें से दो-ढाई वर्ष पूर्व 45 पीआरडी जवान को मेरठ सिटी ट्रांसपोर्ट में भेजे गए थे। वर्तमान में अभी 20-22 कार्य कर रहे है। बताया कि सभी जवानों को नियमों के तहत भेजा गया था। सभी की ट्रेनिंग हुई थी।