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भोले की आस्था के बाजार में 200 करोड़ धनवर्षा की उम्मीद

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मेरठ। धार्मिक आस्था के सैलाब के रूप में पहचान रखने वाली कांवड़ यात्रा अगले सप्ताह शुरू हो जाएगी। वहीं कावंड़ का बाजार भी सजना शुरू हो गया है। इस महापर्व पर अकेले मेरठ के बाजार में ही 200 करोड़ से ज्यादा का कारोबार होने की उम्मीद है। इस कांवड़ यात्रा में शिवभक्त अपनी तैयारी के हिसाब से खरीददारी करेंगे ही, लेकिन उससे भी बड़ा व्यापार इन शिवभक्तों की सेवा में लगने वाले कांवड़ सेवा शिविरों से होगा।
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दो लाख कांवड़ियों के आने की उम्मीद
हर साल कांवड़ यात्रियाें की संख्या में इजाफा होता आ रहा है। कांवड़ियों की संख्या में इस बार और इजाफा होने की उम्मीद है। पिछले साल यह आंकड़ा डेढ़ लाख के पार था तो इस बार संख्या दो लाख के आसपास मानी जा रही है।
एक कावंड़िया करता है औसतन चार हजार खर्च
एक कावंड़ियां अपनी यात्रा की तैयारी में औसतन दो से पांच हजार तक खर्च करता है। इसमें हाफ पेंट, टी शर्ट, अंडरवियर और बनियान के साथ तौलिया, पिट्ठू बैग, पर्स वाली बेल्ट, जूते, चप्पल, पानी की बोतल आदि खरीदता है। यह पूरा सामान औसतन ढाई हजार रुपये तक में बैठता है। ऐसे में कारोबार का यह आंकड़ा औसतन 50 करोड़ बैठता है।
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ट्रांसपोर्ट, डीजल, मजदूर आदि पर खर्च
कांवड़ यात्रा के दौरान ट्रांसपोर्टरों का कारोबार भी बेहतर रहता है। कांवड़ियों के समूहों को हरिद्वार तक छोड़कर आने, डाक कांवड़ियों को लेकर जाने और लेकर आने, कांवड़ सेवा शिविरों में सामान ढोने आदि के लिए जहां बड़ी संख्या में गाड़ियां बुक होती हैं। कांवड़ सेवा शिविरों और डाक कांवड़ के लिए जेनरेटर की बुकिंग भी फुल रहती है। इन सब में डीजल का भी मोटा खर्च आता है। इसके अलावा सेवा शिविरों के लिए हलवाई और मजदूरों की बुकिंग भी एडवांस में हो जाती है। इस पूरी व्यवस्था पर करीब 20 करोड़ का खर्च आता है।
दवाओं पर भी होता है खर्च
कांवड़ यात्रा के दौरान चिकित्सा शिविरों के साथ मोबाइल चिकित्सा वैन भी घूमती है। इसके साथ ही कांवड़ यात्री भी अपने साथ जरूरत की दवा लेकर जाते हैं। यदि इस कांवड़ यात्रा के दौरान दवाओं की अलग से होने वाली बिक्री का अनुमान लगाएं तो यह 3 करोड़ तक बैठता है।
अन्य सामानों की भी होती है बिक्री
कांवड़ यात्रा में भोले अपने साथ जरूरतों के सामान के साथ कुछ अन्य सामान भी खरीदते हैं। इनमें मुख्य रूप से हॉकी, बेसबाल के बैट की मांग सबसे ज्यादा होती है। इससे स्पोर्र्ट्स व्यापारियों का कारोबार भी चमकता है। स्पोर्र्ट्स कारोबारियों के अनुसार करीब 50 लाख का कारोबार हो जाता है।
डाक कांवड़ और झांकी पर मोटा खर्च
कांवड़ यात्रा में पिछले कुछ सालों से डाक कांवड़ का चलन बढ़ा है। किसी विशेष थीम पर झांकी बनाकर शिव भक्तों की टोली हरिद्वार से जल लेकर आती है। इस झांकी को तैयार करने और अपनी मंजिल तक लाने के लिए एक लाख रुपये से लेकर दस लाख रुपये तक का खर्च आता है। ऐसे में मेरठ जनपद से तैयार होकर जाने वाली इस झांकी कांवड़ की तैयारी के लिए करीब 30 करोड़ का व्यापार हो जाता है।
कांवड़ सेवा शिविर में होता है खर्च
कांवड़ यात्रा के दौरान शिव भक्तों की सेवा के लिए लगने वाले सेवा शिविरों में सबसे ज्यादा खर्च आता है। पूरे जनपद में 300 सौ से ज्यादा कांवड़ सेवा शिविर लगते हैं। इन शिविरों में कांवड़ियों के नहाने के लिए ठंडे गर्म पानी से लेकर नाश्ता, दोपहर का खाना, शाम की चाय आदि के साथ रात के खाने और दूध आदि की व्यवस्था होती है। सेवा शिविरों में भोजन शुद्ध घी से ही तैयार होता है। इसके अलावा सेवा शिविरों में अब फास्ट फूड, आइसक्रीम, जूस, फल आदि की बड़े स्तर पर व्यवस्था होती है। ऐसे में एक कांवड़ सेवा शिविर पर एक लाख रुपये से 30 लाख रुपये तक का खर्च आता है। इन कांवड़ सेवा शिविरों के माध्यम से सब्जी, फल, किराना स्टोर, साउंड, लाइट आदि सभी पर खुलकर खर्च किया जाता है। यही नहीं अधिकांश कांवड़ सेवा शिविरों में रात्रि विश्राम के लिए बिस्तर की भी व्यवस्था कांवड़ियों के लिए कराई जाती है।
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