मेरठ। अब्दुल्लापुर में चल रहे लगभग पचास करोड़ की संपत्ति के विवाद में इसे वक्फ से बाहर दिखाते हुए त्रुटिपूर्ण रिपोर्ट बेचने वाले तहसील कर्मियों पर एफआईआर होगी। इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है। इस जमीन पर एमडीए ने तो कार्रवाई कर दी है। लेकिन अब तहसीलकर्मियों पर भी केस दर्ज कराने की तैयारी है।
यह है पूरा प्रकरण
अब्दुल्लापुर में वक्फ संपत्ति को लेकर शिकायत की गई। दावा किया गया कि यह सैयद मोहम्मद वक्फ की संपत्ति है। सन 1967 में करीब सौ बीघा इस जमीन को दो अलग-अलग हिस्से में बेच दिया गया। सैयद मोहम्मद के परिवार के ही लोगों ने इसे बेचा। इस जमीन पर टाउनशिप डेवलप की जा रही है। बाद में इसी संपत्ति को लेकर सैयद मोहम्मद के ही परिवार के लोगों ने वक्फ बोर्ड और हाईकोर्ट में वाद दायर किया। हाईकोर्ट ने कहा है कि वक्फ बोर्ड तय करे कि यह जमीन वक्फ है या नहीं। इस बाबत तहसील से रिपोर्ट मांगी गई।
तहसील की रिपोर्ट पर खड़े हो गए सवाल
तहसील की रिपोर्ट में ही सवाल खड़े हो गए हैं। अब्दुल्लापुर मेरठ तहसील क्षेत्र के तत्कालीन लेखपाल गुरुमेहर सिंह ने खेल किया। उन खसरा नंबरों को वक्फ से बाहर दिखाते हुए रिपोर्ट सीधी ही वक्फ बोर्ड को दस्ती रूप में भेजी। इसी पर वक्फ बोर्ड ने भी आदेश कर दिया कि यह जमीन वक्फ बोर्ड की संपत्ति नहीं है। हैरत की बात यह रही कि यह रिपोर्ट उन लोगों के माध्यम से ही वक्फ को भेजी गई जिनके खिलाफ वक्फ संपत्ति पर कब्जा करने की शिकायत थी।
खुद भी स्वीकार की गलती
आठ फरवरी 2016 को खुद लेखपाल गुरु मेहर सिंह ने यह स्वीकार करते हुए एसडीएम मेरठ को रिपोर्ट भेजी कि उसने त्रुटिपूर्ण रिपोर्ट प्रेषित की थी। कहा गया कि उसकी पूर्व में भेजी गई आख्या का संज्ञान न लिया जाए। बाद मेें एसडीएम की जांच में भी यह आया कि लेखपाल ने त्रुटिपूर्ण आख्या दी है।
अब होगी एफआईआर
आयुक्त स्तर से कराई गई जांच में एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट दी कि यह प्रकरण दो निजी पक्षों के मध्य है। सिविल न्यायालय स्थिति स्पष्ट कर चुका है। हाईकोर्ट एवं शासनादेश द्वारा पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को दो पक्षों की अचल संपत्ति के विवादों में प्रशासनिक हस्तक्षेप से निषेधित किया गया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि स्वामित्व वक्फ बोर्ड करे। यह अभी विचाराधीन है। लेकिन जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि तत्कालीन लेखपाल गुरूमेहर सिंह द्वारा आख्या सीधे ईआरके में तैनात हिमांशु जोकि बीएसए कार्यालय से संबद्ध था, द्वारा सीधे उन्हीं लोगों को दे दी गई जिनके संबंध में शिकायत की गई थी। इस आख्या पर एसडीएम एवं डीएम स्तर से अनुमोदन भी नहीं लिया गया। इस पर आयुक्त ने कहा है कि ऐसा कृत्य करने गुरुमेहर एवं हिमांशु के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की जाए। साथ ही इनके तथा एसडीएम रिपोर्ट में शामिल लोगों पर एफआईआर कराई जाए।