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मम्मी-पापा से सुना...इसलिए ये कॉलेज चुना

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मम्मी-पापा से सुना...इसलिए ये कॉलेज चुना
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- मेरठ कॉलेज हो या डीएन, आरजी हो या इस्माईल, स्टूडेंट्स के परिवारों का रहा पुराना नाता
- एडमिशन लेने पहुंचे छात्र-छात्राएं बोले, इन कॉलेजों का पहले से सुन रखा था बहुत नाम
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। किठौर के इदरीश मेमोरियल इंटर कॉलेज से 12वीं करने वाले मोहम्मद जैद मेरठ कॉलेज में बीएससी मैथ में एडमिशन लेने पहुंचे थे। यूपी बोर्ड से 83 फीसदी अंकों के साथ पास होने वाले जैद से मेरठ कॉलेज को ही चुनने का कारण पूछा तो उनका जवाब साफ था। मेरे टीचर यहीं पर पढ़े। उन्होंने मुझे बताया कि मेरठ कॉलेज से अच्छा कहीं कॉलेज नहीं मिलेगा। डीयू में नंबर आता नहीं। आ भी जाता तो वहां का खर्चा संभालना मुश्किल था।
बीएससी में ही एडमिशन लेने के लिए मम्मी के साथ पहुंचे अभय चौधरी कभी मेरठ कॉलेज नहीं आए लेकिन उनको यहां के बारे में पूरी जानकारी थी। किसी दूसरे कॉलेज में फार्म क्यों नहीं भरा सवाल पर उन्होंने बताया कि चाचा यहीं पढ़े थे। दूसरे कई रिश्तेदार भी। उन्होंने ही बता रखा था कि इससे अच्छा कॉलेज आपको नहीं मिलेेगा। बीए में एडमिशन लेने पहुंचे रतनदेव के परिवार के कई लोग भी मेरठ कॉलेज में ही पढ़े इसलिए उसने भी यहीं दाखिला लेने की सोच ली थी।
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डीएन कॉलेज में एडमिशन लेने पहुंचे सौरभ ने बताया कि उनके पापा डीएन में पढ़े थे। उसको बीकॉम करना है। 82 प्रतिशत अंक होने के चलते डीयू में एडमिशन मिलना मुश्किल था। पापा ने बताया कि डीएन से अच्छा कुछ भी नहीं है। कोएड कॉलेजों में ही ये हाल नहीं मिला गर्ल्स कॉलेजों में भी अधिकतर छात्राओं की यही कहानी सामने आई। छात्र-छात्राओं का कहना था कि च्वाइस भरने से पहले उन्होंने परिवार के लोगों, रिश्तेदारों और स्कूल के टीचर्स आदि से कॉलेजों के बारे में बात की तो सभी ने उन्हीं कॉलेजों को अच्छा बताया जहां से वे सब पढ़े थे। कई छात्राएं उन्हीं गर्ल्स कॉलेजों में एडमिशन ले रही हैं जहां पर कभी उनकी मम्मी ने पढ़ाई की थी।

दीदी ने इसी कॉलेज से किया बीए
मेरे पड़ोस की दीदी ने कनोहर लाल डिग्री कॉलेज से ही बीए किया था। उन्होंने बताया कि यह कॉलेज सबसे अच्छा है। यहां पूरा अनुशासन, अच्छी लैब, अच्छी पढ़ाई सब है। इसलिए मैंने भी इसी कॉलेज में प्रवेश लिया है। खुशबू बीए कनोहर लाल डिग्री कॉलेज
बुआ ने इसी कॉलेज से किया ग्रेजुएशन
मेरी बुआजी ने इसी कॉलेज से ग्रेजुएशन किया था। बुआ हमेशा कॉलेज की तारीफ करती हैं। लड़कियों के लिए अच्छा माहौल है। सुरक्षा भी है। पढ़ाई ठीक है। इसलिए पापा ने कहा कि मैं भी यहीं पढूं और मैंने भी यहीं से बीए करने का सोचा है। सोनम बीए, आरजी पीजी कॉलेज
सारी सहेलियों को मिला एक ही कॉलेज
हम सहेलियों ने 12वीं की पढ़ाई के वक्त ही तय कर लिया था कि हम सब ग्रेजुएशन भी साथ करेंगे। बीए में भी हम एक दूसरे का साथ नहीं छोड़ेंगे। इसलिए हम सभी ने एक ही कॉलेज का फार्म भरा। इत्तेफाक से हम सभी का चयन भी हो गया है। स्वाति बीए, आरजी पीजी कॉलेज
मम्मी यहां से पढ़ी तो मैं भी पढ़ूंगी
मेरी मम्मी ने कनोहर लाल कॉलेज से ही बीए किया है। इसलिए मैं भी इसी कॉलेज में पढूंगी। मम्मी से जैसा सुना था वैसा ही इस कॉलेज को पाया। शिक्षिकाओं का व्यवहार भी अच्छा है। रजनी रानी बीए, कनोहर लाल कॉलेज
टीचर ने बताया इसलिए यहीं लूंगी दाखिला
12वीं में मेरे स्कूल की एक टीचर कनोहर लाल कॉलेज से ही पढ़ी हुई हैं। उन्होंने स्कूल में ही मुझे बताया था कि बीए के लिए कनोहर लाल कॉलेज अच्छा है। इसलिए मैंने इसी कॉलेज में दाखिला लिया है। यहां अनुशासन और सुविधाएं दोनों अच्छी हैं। मोमिना बीए, कनोहर लाल कॉलेज
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न्यू स्टूडेंट्स के लिए एडवाइजरी
एडमिशन लेने पहुंचे छात्र-छात्राओं के लिए कॉलेज का अनुभव एकदम नया था। बड़ी बिल्डिंग, जगह-जगह खड़े युवा। फिल्मों में दिखने वाले कॉलेजों की तरह कैंपस भले ही न हों लेकिन एडमिशन लेने वाले छात्र-छात्राएं बेहद उत्साहित नजर आए। कुछ छात्र-छात्राएं सहमे हुए भी थे। कॉलेज में उनको रैंगिंग शब्द के बारे में परिवार के लोगों ने जो बता रखा था। लेकिन कॉलेजों में स्टूडेंट्स को डरने की जरुरत नहीं है। अगर कोई आपको परेशान करता है या खुद को सीनियर बताकर नाम आदि पूछने की कोशिश करता है तो सीधे कॉलेज के स्टाफ से शिकायत करें। इसके अलावा एडमिशन ऑनलाइन हो रहे हैं। ऐसे में अगर कोई परेशानी आ रही है तो संबंधित विभाग में जाकर शिक्षकों से बात करें।
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