गंगानगर। आईआईएमटी यूनिवर्सिटी में सोमवार को ‘तीन तलाक का मुस्लिम महिलाओं पर प्रभाव’ विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें समाज सेवी और शिक्षिकों ने तीन तलाक पर अपनी बेबाक राय रखी। यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति योगेश मोहन ने कहा कि राजनेता स्वार्थ में लीन होकर देश की जनता का अहित कर रहे हैं। हिंदुस्तान की तरक्की सभी धर्मों के भाईचारे से संभव है। तीन तलाक का मुद्दा पिछले कुछ वर्षों से चर्चा का विषय बना हुआ है। इस सम्मेलन का आंकलन, रिपोर्ट प्रधानमंत्री के पास भेजेंगे। यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि हम अपने छात्रों को समाज से जोड़ने का भरपूर प्रयास कर रहे हैं।
सीसीएसयू उर्दू विभाग से प्रो. डॉ. शादाब अलीम ने कहा कि आमतौर पर मुस्लिम महिलाओं को कमजोर समझा जाता रहा है। इस्लाम ने हमेशा महिलाओं का समर्थन एवं प्रोत्साहन किया है। एएमयू की प्रो. डॉ. नगमा अजहर ने कहा कि तीन तलाक कानून से मर्द ज्यादा परेशान दिखाई दे रहे है। तीन तलाक देने का फैशन चल गया है। परवरिश के समय अपने बच्चों को अच्छी तालीम देने की आवश्यकता है। एएमयू से डॉ. फिरदोस इकराम ने कहा कि तीन तलाक वास्तव में घरेलू समस्या की उपज है। तीन तलाक का मुद्दे जबरन बहस का मुद्दा बनाया गया है। जबकि सरकार को मुस्लिम महिलाओं की आर्थिक स्थिति, रोजगार, स्वास्थ्य के बारे में ज्यादा चर्चा करनी चाहिए।
हुस्ना बेगम स्कूल मेरठ स्कूल के प्रधानाचार्य शहनाज अहमद ने कहा कि तीन तलाक के ऊपर इतना बड़ा सियासी द्वंद्व होते देखना वाकई हैरान करने वाला है। सरकार को मुस्लिम बेटियों की शिक्षा के लिए नए प्रावधान करना चाहिए, उन्हें रोजगार के क्षेत्र में मौके देने चाहिए। ताहिरा रिजवी ने कहा कि हम मुस्लिम अल्लाह एवं कुरान की बातों को नहीं मानते और इसी की वजह से तीन तलाक इतना बड़ा मुद्दा बन गया है। तीन तलाक अल्लाह की सबसे नापसंद बातों में से एक है। तीन तलाक में सरकार का दखल गलत है। इस्माईल महिला पीजी कॉलेज की शिक्षिका निगहत सैय्यद ने कहा कि यह सभी जान लें कि महिलाएं अब किसी तरह से कमजोर नहीं रह गईं है। तीन तलाक के लिए हमें समाज में परिवर्तन लाना होगा।
इस मौके पर नायाब जेहरा जैदी, बज्में ख्वातीन, फराहाना अलीम, सुमैय्या सिद्दीकी एवं अर्शी अंसारी ने भी अपने विचार रखे। प्रो चांसलर अभिनव मोहन ने अतिथियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन नेहा खान ने किया। सम्मेलन में विचारों का सारांश सुम्बुल रिजवी ने प्रस्तुत किया। डॉ. आफताब अहमद ने सभी का शुक्रिया अदा किया। अली अकबर, मो. इकबाल, डॉ. इरम मुमताज, डॉ. नासिर फारूकी, डॉ. जहांगीर आलम, डॉ. फरहा हाशमी, रूबीना, डॉ. एहताशाम, नदीम अली, रिजवान खान, फिरोज खान आदि मौजूद रहे।