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अप्पाजी की पसंदीदा ठुमरी से शिष्या ने दी स्वरांजलि

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मेरठ। ठुमरी की शान पद्मविभूषण डॉ. गिरिजा देवी (अप्पाजी) को उनकी प्रिय शिष्या सुनंदा शर्मा ने श्रद्धांजलि दी। बृहस्पतिवार को दीवान पब्लिक स्कूल में स्पिक मैके के तत्वावधान में अप्पाजी की स्मृति में संगीत समारोह आयोजित हुआ। इसमें अप्पाजी की शिष्या ठुमरी गायिका सुनंदा शर्मा ने सुरों की नक्काशी में शास्त्रीय संगीत को बखूबी पिरोया। गिरिजा देवी की पसंदीदा ठुमरी बाबुल मोरा नैहर छूटो जाए का भावनात्मक गायन किया।
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समारोह में स्कूल प्रिंसिपल एचएम राउत ने सुनंदा शर्मा का स्वागत किया। संगीत की महफिल का आगाज अलाप से किया। बढ़ते दिन के राग मियां की तोड़ी में ख्याल ‘अब मोरी नैय्या पार करो रे’ को सजाया। पंजाब का लोकगायन टप्पा खांटी लोक अंदाज में सुनाया। शृंगार रस से सजी बंदिश तक निगाह यार दी जोरा जोरी दा को संगीत के सदाबहार राग भैरवी में शास्त्रीय अंदाज में सुनाया। झूला गीत अरे सावरियां झूला झूलत मोरा जियरा डरत है सुनाया। अंत में गुरु मां अप्पाजी की पसंदीदा ठुमरी बाबुल मोरा नैहर छूटो ही जाए से समारोह को विश्राम दिया। तबले पर उस्ताद डॉ. जयशंकर, हारमोनियम पर जमीर अहमद खां ने संगतकारी दी। स्पिक मैके की कोआर्डिनेटर सुचेता सहगल, शिक्षिका रम्मू, संजीव छाबड़ा ने सहयोग दिया।
सुनंदा संग छात्रों ने मिलाए सुर
सुनंदा शर्मा ने छात्रों को संगीत सुनाने के साथ उसकी बारीकियां भी बताईं। छात्रों को झूला गीत झूला धीरे झुलाए सांवरिया में अपने साथ लिया। छात्रों के साथ जुगलबंदी की। छात्रों ने भी संगीत समारोह का पूरा आनंद लिया।
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यह है टप्पा
सुनंदा शर्मा ने छात्रों को संगीत की पूरी जानकारी भी दी। दिन में कभी भी गाने वाला राग है भैरवी, हर संगीत समारोह क ा समापन राग भैरवी से होता है। पंजाबी लोकगीत टप्पा के बारे में बताया कि टप्पा हमेशा सिंगार रस में सुनाते हैं। भारतीय संगीत की बेहद कठिन विधा है टप्पा। मियां शौरी ने सालों पहले टप्पे लिखे थे, उन्हीं ने टप्पों को अस्तित्व दिया। वर्तमान में दो-चार गायक ही टप्पे गा रहे हैं। टप्पे का अर्थ जंप (कूदना) है। संगीत में एक सुर से दूसरे सुर में कूदना ही टप्पा है। ख्याल की तालीम के बाद टप्पे की तालीम शुरू होती है। मुर्किंयों का सर्वाधिक प्रयोग टप्पे में होता है। छात्रों को अलाप सुनने का सही तरीका भी बताया। शास्त्रीय, उपशास्त्रीय व लोक गायन की जानकारी दी।
नार्वेवासियों को खूब लुभाता है भारतीय संगीत
सुनंदा शर्मा के साथ तबले पर संगत करने आए डॉ. जयशंकर ने नार्वे से एमबीबीएस किया, इसके बाद तबला सीखा। लंबे समय तक नार्वे में रहे डॉ. जयशंकर ने बताया कि नार्वेवासियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत बहुत लुभाता है। वहां कई आयोजन होते रहते हैं।
स्मरण हो गई गुरु जी के साथ की प्रस्तुति
सुनंदा शर्मा 1 फरवरी 2002 में डॉ. गिरिजा देवी के साथ दीवान स्कूल में प्रस्तुति दे चुकी हैं। बताया कि स्पिक मैके मेरठ चैप्टर की शुरूआत 2002 में इसी मंच से अप्पाजी ने की थी। उस समय वे यहां प्रस्तुति देने आई थीं। सुनंदा शर्मा ने कहा गुरु के साथ जिस मंच को साझा किया उसी मंच से उन्हें याद करना खास है।
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