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बेटियां बोलीं, पुलिस दे सुरक्षा

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मेरठ। शहर में महिलाओं, युवतियाें और छात्राओं की सुरक्षा का आधार बना एंटी रोमियो अभियान चार दिन की चांदनी साबित हुआ। पुलिस ने चार दिन मनचलों को पकड़ा, महिला कॉलेजों के बाहर पहरेदार की भूमिका निभाई, लेकिन अब सब ठंडा पड़ा है। कॉलेज, स्कूलों के बाहर फिर युवकों की भीड़ लगने लगी है। बाजारों में युवतियों से छेड़खानी जारी है। एंटी रोमियो अभियान कितना सफल था इस मुद्दे पर अमर उजाला ने कैंपस अड्डा किया। आरजी पीजी कॉलेज की छात्राओं ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि पुलिस सड़क पर देखकर हमारे हौसले बढ़े थे। अभियान बंद होने से मनचले फिर सक्रिय हो चुके हैं। पुलिस फिर से अभियान चलाए।
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सुरक्षा महसूस होने लगी थी
कॉलेज के बाहर जब पुलिस खड़ी होती है तो हम लोगों को भी बहुत सुरक्षा महसूस होती है। लगता है कि हमें कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता। इसलिए एंटी रोमियो अभियान फिर से शुरू होना चाहिए। - मीनाक्षी
मुश्किल से आती हैं कॉलेज
गांवों से आने वाली कई सहेलियां हैं जो घर से कॉलेज आते वक्त छेड़खानी का शिकार होती हैं। बहुत मुश्किल से कॉलेज आ पाती हैं। उन्हें बहुत सुकून हुआ था जब पुलिस ने ऐसे लड़कों को पकड़ा था। - रानी
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नहीं दिखते थे युवक
हापुड़ अड्डे के पास बाइकों पर काफी लड़के रहते हैं। आते-जाते वक्त लड़कियों से छेड़खानी करते हैं, लेकिन जब एंटी रोमियो अभियान चला था तो कोई नहीं दिखाई देता था। - निदा
कॉलेज के बाहर रहती है भीड़
शहर के किसी भी महिला कॉलेज या स्कूल को देखें उसके बाहर सड़क पर युवक खड़े हो जाते हैं, उनका काम सिर्फ छेड़खानी करना है। जब एंटी रोमियो अभियान चला तो सब डरकर भाग गए थे। - रीता
अभियान की जरूरत है
एंटी रोमियो अभियान की समाज में बहुत जरूरत है, पुलिस ने जरा सी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई तो हम सभी लड़कियों में भी साहस आया था कि हमारी मदद को पुलिस खड़ी है। - नसरीन
अभिभावकों का विश्वास बढ़ा था
आज भी देहात में कई परिवार हैं जो बेटी को स्कूल, कॉलेज भेजने में सिर्फ इसलिए डरते हैं कि कोई छेड़खानी न हो जाए। जब पुलिस ने एंटी रोमियो अभियान चलाया था तो ऐसे अभिभावकों को आत्मविश्वास मिला था लेकिन अब स्थिति फिर खराब हो गई। - कोमल
हमें सुरक्षा दे पुलिस
छात्राओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस की है, हमारे कॉलेज गेट पर जब पुलिस की जीप खड़ी होती है तो कोई मनचला नजर नहीं आता, लेकिन पुलिस के हटते ही युवक खड़े हो जाते हैं। - साइका अंसारी
अभिभावक सुकून में रहते थे
एंटी रोमियो अभियान चलाना जरूरी है। इससे हमारे मम्मी-पापा भी सुकून में रहते हैं, उन्हें लगता है कि हमारी बेटी सुरक्षित कॉलेज जाएगी और लौट आएगी, उसे कोई गलत नहीं बोलेगा। - शबाहत
अब डर लगने लगा
एंटी रोमियो अभियान चलने से हमें खुद लगने लगा था कि हमारी सुरक्षा के लिए कोई है। हम लोगों को किसी से डरने की जरूरत नहीं। लेकिन अब फिर से डर लगने लगा है। - इलमा
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