मेरठ। अमर उजाला और सव्य ज्वैल्स की प्रस्तुति मां तुझे प्रणाम अभियान के कार्यक्रमों की शृंखला में सोमवार की शाम कवि सम्मेलन और मुशायरे के नाम रही। भैसाली मैदान में आयोजित इस विशेष आयोजन में कवियों और शायरों ने क्रांतिधरा को अपने-अपने अंदाज में नमन किया। देशभक्ति का उफान कविता से फूटा तो शायरी भी अपने अदब में पीछे नहीं रही। आजादी के 70वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर कविता और शायरी का संगम विहंगम बन गया। छोटे, बड़े, महिला, हर वर्ग ने कवि सम्मेलन और मुशायरे का लुत्फ उठाया।
कवि सम्मेलन की शुरुआत शायरा मुमताज नसीम द्वारा पेश की गई सरस्वती वंदना से हुई। उन्होंने सुनाया ‘हे सरस्वती मां, तेरे चरणों में अपर्ण मेरे दोनों जहां, मैं तो हर पल तुम्हारी दासी रही, याद करके तुम्हें न उदासी रही, जिस पे नजर तुम्हारी जरा सी रही, उसको जैसी जमीं पर मिल गया आसमां’।
इंकलाबी शायर राहत इंदौरी जब मंच पर आए तो महफिल जवान हो गई। उनकी नज्म और अंदाज ने खूब वाहवाही बटोरी। ‘हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं, मोहब्बत की इस मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं, जो दुनिया को सुनाई देे उसे कहते हैं खामोशी, वो जो आंखों में दिखाई दे उसे तूफान कहते हैं। मेरे अंदर से एक-एक करके सब हो गया रुखसत, एक चीज बाकी है जिसे ईमान कहते हैं’।
‘दुश्मनी दिल की पुरानी चल रही है जान से, दुश्मनी से लड़ते-लड़ते जिंदगी गुजरी है बेईमान से, ईमान से, ए वतन एक रोज तेरी खाक में खो जाएंगे, सो जाएंगे, मरकर भी रिश्ता नहीं टूटेगा हिंदुस्तान से’। ‘देश पर लाख जुल्म मगर कभी बददुआ नहीं देंगे, जमीन मां है जमीं को दगा नहीं देंगे। तूफानों से आंख मिलाओ सैलाबों पर वार करो, मल्लाहों का चक्कर छोड़ो तैरकर दरिया पार करो’। ‘आज हम दोनों को फुरसत है चलो इश्क करें, इश्क दोनों की जरूरत है चलो इश्क करें, आप हिंदू ये मुसलमान ये ईसाई वो सिख, यार छोड़ो ये सियासत है चलो इश्क करें’।
ओज के कवि डॉ. हरिओम पंवार ने अपनी बहुचर्चित रचना चंद्रशेखर आजाद सुनाई तो माहौल पूरी तरह से देशभक्ति के रंग में रंग गया। ‘मैं दिनकर की परंपरा का तारण हूं, भूषण की शैली का अल्प उदाहरण हूं, इसलिए मैं दरबारों के गीत नहीं गा सकता हूं, मैं पीड़ा की चीखों में संगीत नहीं ला सकता हूं। मैं सूरज का बेटा तम के गीत नहीं गा सकता हूं’। हास्य कवि प्रवीण शुक्ल की रचनाओं पर श्रोता मंत्रमुध हो गए। अरुण जैमिनी ने जमकर गुदगुदाया। अरुण जैमिनी ने बेटियों पर फक्र है, से बेटी बचाओ का संदेश दिया। मंगलवार शाम शहीदों के नाम एक दीया जरूर जलाने की अपील की। संचालन प्रवीण शुक्ल ने और अध्यक्षता राहत इंदौरी ने की।
‘नफरत को मिटाओ तो बात है’
पापुलर मेरठी के अंदाज ने कभी गुदगुदाया तो कभी देशभक्ति के तरानों ने जोश भरा। उन्होंने सुनाया ‘नफरत को मिटाओ तो बात है, दुश्मन को गले लगाओ तो बात है, गिरते को उठाओ तो बात है, दूरी को मिटाओ तो बात है’। अपने अंदाज में आगे बढ़े ‘एक बीवी है कई साले हैं, खुदा खैर करे, मेरा ससुराल में कोई भी तरफदार नहीं उनके होठों पर भी ताले हैं, खुदा खैर करे’। युवाओं को सावधान किया ‘बनावटी है हंसी इन हसीनों की, इन पर कभी ऐतबार मत करना, पुलिस के डंडों से हमें ये बात आई है समझ में, अमीर बाप की बेटी से प्यार मत करना’।
‘मोदी जी बीवी बदलने की स्कीम निकालो’
हास्य कवि डॉ. सुनील जोगी ने देशभक्ति और हास्य के रंग में श्रोताओं को सराबोर कर दिया। शुरूआत देशभक्ति के तरानों से हुई। ‘भारत माता के कोट कोटि कोटि बेटे आबाद नहीं होते, इस अमर तिरंगे के सारे रंग जिंदाबाद नहीं होते, आओ मिलकर सारे फूल चढ़ा दें इनके चरणों में, गर अमर शहीद नहीं होते तो हम आजाद नहीं होते’। ‘कसम खा लें अपने देश का कर्जा चुकाएंगे, शहीदों की चिताओं पर हर बरस मेले लगाएंगे, अगर शहीदों के किस्से बच्चों को नहीं सुनाएंगे, हनी सिंह याद रखेंगे भगत सिंह को भूल जाएंगे’। मोदी जी और योगी पर किए हास्य ने खूब गुदगुदाया। सुनाया ‘मोदी जी मीठा बहुत हो चुका, अब नमकीन निकालो, अच्छा हुआ कि नोट बदल डाले, अब बीवी बदलने की स्कीम निकालो’। एंटी रोमियो अभियान पर सूबे के मुख्यमंत्री पर तंज कसा। ‘चाहत के समंदर में उतरने नहीं दूंगा, महबूबा की गलियों से गुजरने नहीं दूंगा, एक रोमियो से योगी जी ने कहा बात ये नहीं, जो मैंने नहीं किया, वो करने नहीं दूंगा’।
‘बेवफा अब तो आ जा खुदा के लिए’
अदब की शायरा मुमताज नसीम को लोगों ने शिद्दत से सुना। उनकी नज्म ने सबका ध्यान खींचा। ‘हर तरफ ढूंढती हैं निगाहें तुम्हें, दिल धड़कता है हर पल तुम्हारे लिए, ऐसा महसूस होने लगा है मुझे, हो गई है मैं पागल तुम्हारे लिए’। ‘सुबह आने लगे, शाम आने लगा, मेरे होठों पे एक नाम आने लगा। जज्बा इश्क अब काम आने लगा, थोड़ा-थोड़ा सा आराम आने लगा’। आगे सुनाया ‘बेवफा अब तो आ जा खुदा के लिए, उम्र की भी अपनी पलकें झपकने लगीं, मेरे सोने से बालों में तेरे बिना, थोड़ी-थोड़ी सी चांदी चमकने लगी’। फरमाइश पर कश्मीर पर लिखी चर्चित नज्म सुनाई। ‘ए अजीजों मुझे कुछ तुमसे शिकायत भी नहीं, और सच पूछो तो इसकी जरूरत भी नहीं’।
इन्होंने किया उद्घाटन
कवि सम्मेलन और मुशायरे का उद्घाटन विधायक रफीक अंसारी, विधायक जितेंद्र सतवई, एसपी देहात राजेश कुमार, एसपी ट्रैफिक संजीव वाजपेयी, शहर काजी जैनुस साजिद्दीन ने किया। सव्या ज्वैलर्स के अमित गुप्ता ने कवियों और शायरों का स्वागत किया।
ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार, एडीजी मेरठ जोन प्रशांत कुमार, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनके तनेजा, एसएसपी मंजिल सैनी दहल, एसपी सिटी मान सिंह चौहान, एसपी ट्रैफिक संजीव वाजपेयी, एसपी देहात राजेश कुमार, एडिशनल एसपी रणविजय सिंह, विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल, विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमर, एडीएम सत्यप्रकाश पटेल, विधायक रफीक अंसारी, बिजेंद्र अग्रवाल, केएमसी के चेयरमैन डॉ. सुनील गुप्ता, सपा जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह, जयवीर सिंह, आदिल चौधरी, चैतन्य देव स्वामी, संगीता राहुल, शरीफ मेवाती, वसीम राहुल्र शाहजहां सैफी, रोहित गुर्जर, नीरज जिटौली, इंस्पेक्टर सदर बाजार प्रशांत कपिल, दयाशंकर द्विवेदी, उमेश चंद पचौरी आदि मौजूद रहे।
खास बात
- भैसाली मैदान में कवि सम्मेलन और मुशायरे के नाम रही स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या
- मां तुझे प्रणाम के तहत कवियों और शायरों ने बांधा समा, देशभक्ति की बही धारा, श्रोता झूम उठे