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गन्ना सर्वेक्षण में शामिल हुए शुगर मिल, उठ रहे सवाल

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गन्ना सर्वेक्षण में शामिल हुए शुगर मिल, उठ रहे सवाल
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- पिछले साल विभाग ने गन्ना मिल प्रतिनिधियों के बिना कराया था सर्वेक्षण
- गन्न विभाग में कर्मचारी कम होने के कारण दोबारा शामिल किए गए मिल प्रतिनिधि
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। पिछले साल गन्ना सर्वे से शुगर मिलों को अलग रखने वाला गन्ना विभाग इस बार बैकफुट पर है। कर्मचारियों की कमी का रोना रोते हुए विभाग ने फिर से सर्वे में शुगर मिलों को शामिल कर लिया है। अब गन्ना विभाग व शुगर मिल प्रतिनिधि संयुक्त रूप से सर्वे कर रहे हैं। शासन के निर्देश पर पांच मई से शुरू हुआ सर्वे 30 जून तक पूरा करना है।
गन्ना सर्वे में फर्जीवाड़ा होने और माफिया की जमीन और गन्ना रकबा बढ़ा दिखाकर सर्वे का लाभ दिए जाने की शिकायतों पर गन्ना विभाग ने पिछले साल शुगर मिलों को इससे अलग कर दिया था। विभाग का कहना था कि पारदर्शी सर्वेक्षण के लिए शुगर मिलों को इससे अलग किया है, लेकिन विभाग के पास पर्याप्त कर्मचारी नहीं होने के चलते समय से सर्वे कार्य पूरा करने में विभाग को पसीना आ गया था। इसके साथ ही विभागीय सर्वे पर सवालिया निशान लगे थे। आगामी सत्र 2019-20 के लिए गन्ना विभाग ने एक बार फिर से सर्वे में शुगर इंडस्ट्री को शामिल किया है। सवाल उठता है कि सर्वे में घपला कर अपने चहेते किसानों को फायदा पहुंचाने वाली मिलों को इसमें शामिल क्यों किया गया है।
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किसानों से लिया जा रहा घोषणा पत्र
मेरठ परिक्षेत्र के उप गन्ना आयुक्त हरपाल सिंह ने बताया कि सर्वेक्षण में पारदर्शिता लाने के लिए गन्ना किसानों से निर्धारित प्रारूप पर धारित गन्ना क्षेत्रफल का घोषणा पत्र लिया जा रहा है। किसान की जमीन की खसरा खतौनी का सत्यापन राजस्व विभाग से कराया जाएगा। गन्ना सर्वे जीपीएस युक्त एचएचसी मशीन से कराया जा रहा है। गन्ना किसानों को मौके पर ही खेत की माप पर्ची उपलब्ध कराई जा रही है। विभागीय अधिकारियों द्वारा सर्वे की निरंतर निगरानी की जा रही है।
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