गरीब की बेटियों की बारात गलियों में रुकने को मजबूर
नगर पंचायत को नहीं मिल पा रही पर्याप्त जमीन, पूर्व सीएम के आदेश पड़ रहे भारी
कमरजिया
फलावदा। नगर पंचायत कार्यालय के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलने से पिछले पांच साल से फलावदा की नगर पंचायत डूडा के तहत बनाए गए बारातघर में चलने को मजबूर है। सपा की सरकार में लागू हुए आदेश के बाद नगर पंचायत कार्यालय बेघर होने के कगार पर आ गया और पर्याप्त जमीन नहीं मिलने से बारातघर में कार्यालय संचालित किया जा रहा है।
सपा सरकार में यह आदेश हुआ था जारी
2012 में सपा की सरकार उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत से आई थी। जिसके बाद जनता की मांग पर सपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश यादव को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया था। उस दौरान पूर्व सीएम ने प्रदेश की सभी नगर पंचायत के नक्शे एक जैसे होने के आदेश जारी किए थे। इस पर नगर पंचायत फलावदा के अधिकारी जमीन की तलाश कर कार्यालय बनाने की तैयारी में जुट गई थे। पहले नगर पंचायत कार्यालय नगर स्थित सहकारी बैंक के साथ बने कार्यालय में चलता था। कार्यालय एक जैसा बनाने के लिए अधिकारियों ने इस कार्यालय को तुड़वा दिया। 12 सौ मीटर जमीन नहीं होने पर यहां कार्यालय बनाने की योजना स्थगित कर दी गई थी।
पांच साल से बारातघर में चल रहा कार्यालय
पूर्व सीएम के आदेश पर नगर पंचायत कार्यालय को डूडा के तहत बनाए गए बारातघर में स्थानांतरित कर दिया गया। तभी से नगर पंचायत कार्यालय के सभी काम यहां हो रहे हैं। अपना कार्यालय बनाने के लिए पंचायत अधिकारियों ने कई जगह पर जमीन देखी, लेकिन पर्याप्त जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण कार्यालय नहीं बन पा रहा है। आलम यह है कि आज नगर पंचायत अधिकारी बारातघर से नगर के विकास कार्यों को हरी झंडी दे रहे हैं।
कहां रुके गरीब बेटियों की बारात
पांच साल से डूडा के तहत बनाए गए बारात घर में नगर पंचायत कार्यालय चल रहा। जिस कारण कस्बे की गरीब बेटियों की बारात को रोकने के लिए दूसरी कोई जगह नहीं है। मंडपों का किराया अधिक होने के कारण बेटियों की बारात को गलियों में टेंट लगाकर रोकना पड़ रहा है।
खाली होना चाहिए बारात घर
गरीब की बेटियों की बारात ठहरने के लिए सरकार ने डूडा योजना के तहत बारातघर का निर्माण कराया था। पांच साल से कोई भी बारात यहां नहीं रुकी है। बारातघर को खाली करना चाहिए।
-राकेश जाटव
सरकार खरीद कर दे जमीन
नगर पंचायत कार्यालय के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। यदि नगर पंचायत कार्यालय के पास अपनी जमीन नहीं है तो सरकार को कार्यालय बनाने के लिए जमीन खरीदकर देनी चाहिए।
-मुनीष
गरीबों की क्या है गलती
सरकार ने 12 सौ मीटर में कार्यालय बनाने के आदेश जारी किए हैं। नगर पंचायत के अधिकारियों को पहले जमीन तलाशनी चाहिए थी। जमीन मिले बिना ही पुराने कार्यालय को तोड़ने की क्या जरूरत थी। आज बारातघर पर नगर पंचायत का कब्जा है। इसमें गरीबों की क्या गलती है। -मनोज
इन्होंने कहा...
खसरा संख्या 487 व 486 पर्याप्त जमीन थी। सुरक्षा की दृष्टि से भी यह जमीन नगर पंचायत के लिए अच्छी थी। यह जमीन थाना फलावदा के समीप है। कुछ लोगों के हस्तक्षेप के चलते इस जमीन पर नगर पंचायत कार्यालय नहीं बनने दिया गया। इसके बाद चौकी के समीप पर्याप्त जमीन पर नगर पंचायत बनाने के लिए प्रस्ताव पास कर शासन से अनुमति ली गई थी। तत्कालीन अधिशासी अधिकारी ने कार्य शुरू नहीं कराया। फिर आचार संहिता लग जाने से कार्य बीच में ही लटक गया।-आयशा खातून, पूर्व चेयरपर्सन फलावदा नगर पंचायत
पूर्व में चिह्नित की गई जमीन सही नहीं थी। दूसरी जमीन का जल्द ही चिह्निकरण कर प्रस्ताव पास किया जाएगा और जल्द से जल्द शासन से अनुमति लेकर नगर पंचायत कार्यालय का निर्माण कराया जाएगा।-अब्दुस समद, चेयरमैन नगर पंचायत फलावदा