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चक्रवाती हवाओं के साथ बारिश और बरसे ओले

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40 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चली हवा
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15 मिमी शहर में तो 21 मिमी देहात में दर्ज की गई बारिश
04 डिग्री गिरा पारा, 24-36 घंटे फिर बारिश व ओलावृष्टि का इनपुट
- चक्रवाती हवाओं ने बदला मौसम, ओलों से फसलों को नुकसान
अमर उजाला ब्यूरो
मोदीपुरम/मेरठ। राजस्थानी हवा से चढ़े पारे को चक्रवाती हवाओं के साथ बरसे बादलों ने बृहस्पतिवार को नीचे ला दिया। गरज के साथ झमाझम बारिश से दिन का तापमान चार डिग्री गिर गया तो ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान पहुंचा। मौसम विशेषज्ञों ने 24 से 36 घंटे के बीच फिर से बारिश और ओले पड़ने का इनपुट दिया है।
पहाड़ों पर सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ और बढ़ रही बर्फबारी के बीच मैदानी क्षेत्रों में फिर से बरसात के साथ ओलावृष्टि हो गई। शहर और देहात क्षेत्र में बृहस्पतिवार तड़के से ही रिमझिम बारिश का दौर शुरू हो गया था। उसके बाद सुबह नौ बजे के बाद गरज के साथ बारिश शुरू हो गई। जिले में कहीं मध्यम तो कहीं तेज बारिश के साथ ओले पड़े। देर शाम भी फिर से तेज बारिश हुई। दिन भर 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चक्रवाती हवाओं के साथ मौसम का मिजाज बदलता गया और तापमान भी गिर गया। आसमान पर दिन भर बादल छाए रहे।
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दिन में छाया अंधेरा
सुबह अचानक से काले बादलों की आमद बढ़ने से दिन में ही अंधेरा छा गया। मुख्य मार्गों और हाईवे पर वाहन चालकों को लाइट जलाने के साथ ही रफ्तार धीमी करनी पड़ी।
अलग-अलग दर्ज हुई बारिश
मौसम विज्ञान केंद्र पर अधिकतम तापमान 20.4 डिग्री व न्यूनतम तापमान 11.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। अधिकतम आर्द्रता 91 व न्यूनतम 69 प्रतिशत दर्ज की गई। शहर में बारिश 15 मिमी और देहात क्षेत्र में 21 मिमी रिकॉर्ड की गई।
दो दिन बाद फिर बिगड़ेगा मौसम
आईआईएफएसआर के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एन. सुभाष का कहना है कि दिन का तापमान सामान्य से तीन डिग्री नीचे आ गया है। अभी चौबीस घंटे तक बारिश के आसार बने हैं। कुछ स्थानों पर ओले भी पड़ सकते हैं। कृषि विवि के मौसम विशेषज्ञ डॉ. यूपी शाही का कहना है कि 24-36 घंटे तक मौसम ऐसे ही रहेगा। बारिश के साथ हवा की रफ्तार 40 किमी प्रति घंटे से ऊपर रहेगी। दो दिन राहत देने के बाद 18 फरवरी से मौसम के बिगड़ने के आसार हैं।
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फसलों के लिए सहीं नहीं बारिश
मौसम विशेषज्ञ डॉ. यूपी शाही का कहना है कि एक सप्ताह पहले भी बारिश और ओलावृष्टि हुई थी। अब फिर से ओले पड़ने से सबसे ज्यादा नुकसान आलू, सरसों, चना और मटर की फसल को होगा। गेहूं की अगेती प्रजाति को भी नुकसान पहुंचेगा। जहां ओला पड़ेगा और तेज हवा रहेगी तो फसल गिर जाएगी, जिससे उत्पादन पर भी इसका बड़ा असर दिखाई देगा। आलू की फसल में पानी भरने के साथ किसानों को समस्या ज्यादा होगी।
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