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याकूब की मीट फैक्टरी का स्टे निरस्त, लगेगी सील

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याकूब की मीट फैक्टरी का स्टे निरस्त, लगेगी सील
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मेरठ। पूर्व मंत्री और बसपा नेता हाजी याकूब कुरैशी की मीट फैक्टरी अल फहीम मीटेक्स पर दिया गया स्टे शासन ने निरस्त कर दिया है। शासन ने कहा है कि फैक्टरी संचालक कोई ऐसा साक्ष्य पेश नहीं कर पाए, जिससे एमडीए के निर्णय को त्रुटिपूर्ण माना जाए। ऐसे में अब इस फैक्टरी पर एमडीए सील लगाने की कार्रवाई करेगा। एमडीए वीसी ने जोनल अधिकारी को निर्देश दिए है कि इस फैक्टरी पर सील लगाने की तारीख तत्काल तय की जाए।
यह है प्रकरण
याकूब कुरैशी की हापुड़ रोड पर अल फहीम मीटेक्स मीट फैक्टरी है। इसके मानचित्र को लेकर विवाद चल रहा है। यहां कई बार टीम जा चुकी है। एमडीए अधिकारियों के मुताबिक इस मीट फैक्टरी का मानचित्र स्वीकृत नहीं है। दरअसल, फैक्टरी में ग्रीन बेल्ट, सार्वजनिक उपयोग की भूमि, रोड बाइडिंग एवं औद्योगिक क्षेत्र की भूमि सम्मिलित है। गत वर्ष एमडीए की टीम फैक्टरी को सील करने गई थी। लेकिन यहां भारी विरोध के कारण टीम खाली हाथ लौट आई। इसके बाद कई बार इस पर सील करने की कोशिश की गई। लेकिन यह प्लान परवान नहीं चढ़ पाया।
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टल गई थी कार्रवाई
इस मामले की पैरवी इस फैक्टरी के निदेशक याकूब कुरैशी के पुत्र इमरान कर रहे हैं। उन्होंने आपत्ति दर्ज कराते हुए मानचित्र स्वीकृति के लिए आवेदन कर दिया गया। उन्होंने तथ्य पेश किए कि प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत मानचित्र में कुल कवर्ड एरिया 34903.83 वर्गमीटर है। मौके पर प्रत्यावेदक की कुल जमीन 126788 वर्गमीटर है। लेकिन प्रत्यावेदक द्वारा मात्र कवर्ड एरिया का मानचित्र स्वीकृत कराने के लिए आवेदन किया गया है। ऐसे में मानचित्र स्वीकृत किया जाए।
आयुक्त के यहां भी दिया था प्रत्यावेदन
इस बाबत तत्कालीन आयुक्त के यहां प्रत्यावेदन किया गया। जांच और तर्क के बाद यह पाया गया कि फैक्टरी का कुल 126788.00 वर्गमीटर है। भूतल पर खुला क्षेत्रफल 85953.60 वर्गमीटर जबकि भूतल पर पर कवर्ड क्षेत्रफल 34903.83 वर्गमीटर है। प्रथम तल पर कवर्ड एरिया 1300.79 वर्गमीटर है। कुल कवर्ड एरिया 36204.61 वर्गमीटर मिला। फैक्टरी स्वामी का यह भी तर्क था कि उनके द्वारा कुल भू भाग पर मात्र 28.88 प्रतिशत भूमि पर ही निर्माण किया गया है।
भू उपयोग की भी बारीकी से की गई जांच
भू उपयोग की जांच में स्पष्ट हुआ कि फैक्टरी में हरित क्षेत्र में निर्मित क्षेत्रफल 2322.81 वर्गमीटर है। औद्योगिक क्षेत्र में निर्मित क्षेत्रफल 1878.62 वर्गमीटर जबकि सार्वजनिक उपयोग की भूमि में निर्मित क्षेत्रफल 30702.40 वर्गमीटर है। हरित क्षेत्र में निर्मित क्षेत्रफल 2322.81 वर्गमीटर को पूरी तरह से अवैध माना गया। आयुक्त ने आदेश दिया कि प्रत्यावेदक खुद निर्माण हटा ले तो ठीक, नहीं तो एमडीए हटाए और उसका खर्चा भी फैक्टरी संचालक से ही वसूले। इस निर्णय पर फिर से अपील कर दी गई।
कार्रवाई पर हो गया था स्टे
कार्रवाई चलती रही और 26 अक्तूबर 2018 को सचिव एमडीए ने आदेश किया किया कि फैक्टरी के इस भाग को सील कर दिया जाए। इस पर इमरान ने शासन में अपील की और 27 दिसंबर को शासन ने कार्रवाई पर रोक लगा दी। कहा कि फैक्टरी मालिक अपना पक्ष रखे। सुनवाई के बाद अब शासन ने अपने ही स्टे को आगे बढ़ाने से इंकार कर दिया है। विशेष सचिव आवास एवं शहरी नियोजन राजेश कुमार पांडेय ने कहा है कि पुनरीक्षणकर्ता ने ऐसा कोई अभिलेखीय तथ्य या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है जो आयुक्त के निर्णय को त्रुटिपूर्ण साबित कर सके। एमडीए एवं आयुक्त के पारित आदेशों में किसी प्रकार के हस्तक्षेप का कोई अवसर नहीं है। ऐसे में पुनरीक्षणवाद को निरस्त कर दिया गया।
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हम अब एक्शन कर सकेंगे
स्टे निरस्त होने पर हम अब अल फहीम पर एक्शन कर सकेंगे। मैंने इस बाबत अधिकारियों से कहा है कि तत्काल इसे सील करने केलिए तारीख तय कर प्रक्रिया शुरू कर दें। -साहब सिंह, वीसी एमडीए
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