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सर्किल रेट बढ़ाने की कवायद के बीच भी नहीं बढ़ा रजिस्ट्री का ग्राफ

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मेरठ। प्रशासन इस बार संपत्तियों के सर्किल रेट बढ़ाने की कवायद कर रहा है। हर बार जब भी प्रॉपर्टी के सर्किल रेट बढ़ाने की तैयारी होती थी तो रजिस्ट्री का ग्राफ बढ़ जाता था, लेकिन इस बार ऐसा नजर नहीं आ रहा। प्रॉपर्टी के गिरते ग्राफ से रजिस्ट्री विभाग को भी घाटा उठाना पड़ रहा है। विभागीय आंकड़े साफ गवाही देते हैं कि 2013 के बाद मेरठ में प्रॉपर्टी खरीद से लोगों ने मुंह मोड़ना शुरू कर दिया है।
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शासन के निर्देश पर जिलाधिकारी द्वारा हर साल जनपद में सर्किल रेट निर्धारित किए जाते हैं। इस सर्किल रेट निर्धारण में ऐसा कभी नहीं हुआ कि रेट घटाए गए हैं, हमेशा रेट या तो पिछले साल के रहे हैं, या फिर 5 से 40 प्रतिशत तक बढ़ाए गए। इसलिए जब भी सर्किल रेट बढ़ने की कवायद होती है, तो जो लोग अपनी खरीदी संपत्तियों की रजिस्ट्री नहीं कराते हैं, वो सर्किल बढ़ने के डर से रजिस्ट्री करा लेेते हैं। क्योंकि सर्किल रेट बढ़ने के बाद स्टांप शुल्क बढ़ जाता है और रजिस्ट्री कराना महंगा हो जाता है। पिछले साल प्रशासन द्वारा सर्किल रेट नहीं बढ़ाए गए थे। बावजूद इसके सर्किल रेट बढ़ने के भय से लोगों ने कुछ रजिस्ट्री कराई थी। लेकिन इस बार रजिस्ट्री का ग्राफ जून में नहीं बढ़ सका।
2013 के बाद आई गिरावट
रजिस्ट्री विभाग के आंकड़े साफ गवाही देते हैं कि वर्ष 2013 के बाद से रजिस्ट्री के ग्राफ में गिरावट आई है। इस दौरान शासन ने लक्ष्य तो बढ़ाया, लेकिन लक्ष्य के अनुरूप वसूली नहीं हो सकी। वर्ष 2013 जून ही ऐसा रहा जिसमें मासिक लक्ष्य का 95 प्रतिशत से ज्यादा रजिस्ट्री विभाग को प्राप्त हुआ।
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ये है पिछले छह सालों की स्थिति
वर्ष (जून) लक्ष्य प्राप्ति (करोड़ में) रजिस्ट्री
2013 39.96 39. 43 5162
2014 44.30 35.56 4411
2015 50.45 34.11 4076
2016 52.01 33.72 3569
2017 52.72 42.65 3621
2018 52.84 40.05 4286




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