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आखिर ठेकेदार क्यों कर रहे हैं पुराने कायोऌं् की जांच का विरोध

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पुराने कार्यों की जांच नए जेई से नहीं होने देंगे
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मेरठ। तत्कालीन अवर अभियंताओं द्वारा शुरू कराए गए सड़क, नाला, निर्माण कार्यों की जांच कराने को निगम के कुछ ठेकेदार सहमत नहीं हैं। सोमवार को जेई और ठेकेदार के बीच जमकर विवाद हुआ था, वहीं मंगलवार को ठेकेदारों का एक प्रतिनिधि मंडल नगरायुक्त से मिला। ठेकेदारों ने कहा कि पुराने कार्यों की जांच नए जेई से नहीं होने देंगे।
शहर में अवस्थापना निधि, 14वें वित्त आयोग, निगम बोर्ड फंड से 30-40 करोड़ के कार्य चल रहे हैं। 20 दिन पहले बड़े स्तर पर नगर निगम में अधिकारियों के स्थानांतरण हुए। निगम के चीफ इंजीनियर, पांच जेई का भी ट्रांसफर हो गया। निर्माण विभाग के तत्कालीन अवर अभियंताओं ने शहर में निर्माण कार्य शुरू कराए थे। वह कार्य चल रहे हैं। इनमें से कुछ पूर्ण हो चुके हैं तो कुछ पर जारी हैं। वहीं दूसरे नगर निगम और नगर पालिकाओं से ट्रांसफर होकर मेरठ नगर निगम आए अवर अभियंता अभी पूरी तरह काम संभाल नहीं पाए हैं।
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बगैर निगरानी चल रहे निर्माण कार्य
ठेकेदारों द्वारा निर्माण कार्य की जांच का विरोध किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर क्या कारण है कि ठेकेदार पूर्व में स्वीकृत निर्माण कार्यों की जांच नहीं कराने पर अड़े हैं। क्या निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। नियमानुसार शहर में किसी भी सड़क, नाली, नाला निर्माण के समय निगरानी रखने और गुणवत्ता पूर्ण निर्माण सामग्री लगवाने के लिए सुपरवाइजर और जेई की तैनाती निश्चित होनी चाहिए। साथ ही चीफ इंजीनियर से लेकर अधिशासी अभियंता और सहायक अभियंता को भी निर्माण कार्य की सूचना होनी चाहिए। इस समय निगम के चीफ इंजीनियर की भी कुर्सी खाली पड़ी है और सभी अवर अभियंता नए आए हैं। जिनको अभी पूरे शहर की भौगोलिक स्थिति की जानकारी नहीं है। शहर में चल रहे विकास कार्यों की कोई निगरानी नहीं है। यही कारण है कि निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री लगाए जाने के आरोप लग रहे हैं।

ये उठ रहे सवाल
निगम ठेकेदार क्यों नहीं कराना चाहते निर्माण कार्यों की जांच।
तत्कालीन अवर अभियंता और ठेकेदार के बीच क्या है मामला।
क्या हकीकत में कमीशन से जुड़ा मामला है।

बंद कमरे में नगरायुक्त और ठेकेदारों की बैठक
निर्माण कार्यों की जांच के विरोध में उतरे ठेकेदारों के साथ नगरायुक्त की बंद कमरे में बैठक हुई। हालांकि बताया जा सहा है कि ठेकेदारों की कार्य प्रणाली से नगरायुक्त नाराज हैं। नगरायुक्त ने ठेकेदारों का पक्ष सुना जरूर, लेकिन उसपर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है। नगरायुक्त ने ठेकेदार और जेई के बीच चल रहे विवाद पर भी कुछ बोलने से इंकार कर दिया। हालांकि ठेकेदार विपिन त्यागी का कहना है कि नगरायुक्त के सामने सभी ठेकेदारों ने पक्ष रख दिया है। मामला निपट गया है। अब कोई विवाद नहीं है।
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शहर के विकास कार्य ही नहीं, पूरा नगर निगम राम भरोसे चल रहा है। सब कुछ अस्तव्यस्त है। न अधिकारी जनता की सुन रहे हैं और न विकास कार्यों की गुणवत्ता की जांच हो रही है। अगर एक एक काम की जांच करा दी जाए तो बड़े घोटाले खुलकर सामने आएंगे। हमने कुछ निर्माण कार्यों की जांच कराई थी। लेकिन निगम के अधिकारी रिपोर्ट ही दबाकर बैठ गए। सुनीता वर्मा, महापौर
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