मेरठ।
हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है,
चल पड़ेंगे जिस तरफ रास्ता हो जाएगा।
मशहूर शायर बशीर बद्र का ये शेर शहर की माधवपुरम निवासी पूजा यादव पर सटीक बैठता है। जिन्होंने पुरुषों के प्रभुत्व वाले ड्राइविंग के प्रोफेशन को अपनाकर एक मिथक तोड़ा कि पुरुष ही ऑटो या टैक्सी चला सकते हैं। संभवत: पूजा मेरठ की पहली युवती हैं, जो वैन से स्कूली बच्चों को घर और स्कूल छोड़ने का काम करती हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए पूजा ने 12वीं कक्षा में ही हाथों में स्टेयरिंग थाम लिया। आज वह पढ़ाई के साथ-साथ पार्ट टाइम बखूबी अपने काम को कर रही हैं।
पूजा यादव तीन बहनों में सबसे छोटी हैं। माता गृहणी है। पिता सुरेश चंद आर्मी की नौकरी छोड़ने के बाद ऑटो से स्कूली बच्चों को छोड़ने का काम करते हैं। करीब दो वर्ष पूर्व सुरेशचंद्र बीमार पड़ गए। इस दौरान पूजा ने पापा के काम को बाधित नहीं होने दिया। बल्कि ऑटो का स्टेयरिंग थामा और बच्चों को सकुशल स्कूल तक पहुंचाया। उसके बाद पूजा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
सुबह 4:00 बजे से रूटीन शुरू
शहीद मंगल पांडे महिला महाविद्यालय से बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा पूजा ने इस काम को पार्ट टाइम अपनाने का फैसला किया। पूजा सुबह चार बजे उठकर रनिंग करती हैं फिर नाश्ते के बाद पढ़ाई। आठ बजते ही पूजा अपनी वैन से बच्चों को स्कूल छोड़ती हैं और वापस लाती हैं। पूजा का कहना है कि वह अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद रेलवे में बतौर ड्राइवर नौकरी करना चाहती हैं। इसके लिए वह तैयारी भी कर रही हैं। पूजा की सबसे बड़ी बहन संजू बीएड हैं। दूसरे नंबर की बहन अन्नू भी शहीद मंगल पांडे महिला कालेज से बीएड कर रही है। वह छात्र संघ की कोषाध्यक्ष भी हैं।
बेटी के कहने पर दिलाई वैन
पिता की बीमारी के दौरान पूजा ने पूरे सप्ताह ऑटो से बच्चों को स्कूल छोड़ने का काम किया। इसके बाद पूजा को घर पर खाली बैठना अच्छा नही लगा। उसने पापा से वैन दिलाने की बात कही और बच्चों को स्कूल तक छोड़ने का काम करने को कहा। इस पर उसके पिता ने गुरु नानक नगर दिल्ली रोड स्थित गुरु तेग बहादुर स्कूल की प्रिंसिपल रेखा बंसल से बात की। उन्होंने भी पूजा के साहस को देखते हुए सहमति जताई। इसके बाद पिता सुरेश चंद ने उन्हें वैन दिला दी।
पिता को था बेटा न होने का मलाल
पूजा के पिता सुरेश चंद को बेटा न होने का मलाल था। लेकिन पूजा ने उनका बेटा बनकर उनकी इस कमी को पूरा कर दिया है। सुरेश चंद का कहना है कि मेरी बेटी कंधे से कंधा मिलाकर परिवार की मदद करती है। उनकी बेटी किसी बेटे से कम नहीं है। पूजा ने उनकी इस कमी को पूरा कर दिया है।
एक-दूसरे को बांधती हैं राखी
पूजा यादव ने बताया कि रक्षाबंधन के पर्व पर उन्हें भाई न होने का मलाल होता था। लेकिन इसकी कमी दूर कर रक्षाबंधन के त्योहार में दोनों बहनों ने पूजा को राखी बांधकर भाई की कमी को पूरा कर दिया।
पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं सुरक्षित ड्राइवर
पांचवीं में पढ़ने वाली दिव्यांशी की मां रेनु कहतीं हैं कि पुरुष ड्राइवर की अपेक्षा महिला ड्राइवर लड़कियों के लिए सुरक्षा की मुहर हैं। पूजा के साथ बिटिया को स्कूल भेजते समय पूर्ण सुरक्षा का अहसास होता है।
पहले लगा था अजीब
सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली साक्षी के पिता मोहित गुप्ता कहते हैं कि बेटी को पूजा के साथ वैन से स्कूल भेजना पहले अजीब लगा। लेकिन अब अच्छा लगता है। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास से लबरेज पूजा बेटी की सुरक्षा का दूसरा नाम है।
पूजा यादव स्कूली बच्चों को छोड़ने वाली मेरठ की पहली युवती है। उसे मौका देने वाली मैं भी पहली प्रिंसिपल हूं। मेरी अपील है कि कोई और महिला ड्राइवर यदि साहस करें तो मैं उसे भी मौका दूंगी। -रेखा बंसल, प्रिंसिपल जीटीबी पब्लिक स्कूल, दिल्ली रोड
खास बातें
पढ़ाई के साथ वैन से स्कूली बच्चों को छोड़ने का काम करती हैं पूजा
पुरुषों के प्रभुत्व वाले ड्राइविंग के प्रोफेशन को अपनाकर तोड़ा मिथक
सरकारी नौकरी में बनाना चाहती हैं करियर, इसके लिए कर रहीं तैयारी