मेरठ। एनएएस और डीएन कॉलेज में शुक्रवार दिनभर हंगामे की बीच छात्रसंघ चुनाव संपन्न हुआ। कुछ छात्र तो पुलिस से भी भिड़ गए। एनएएस कॉलेज में एबीवीपी के छात्र आपस में भिड़ गए। मारपीट हुई पुलिस ने एक दर्जन से अधिक छात्रों को हिरासत में लिए और थाने ले आए। डीएन कॉलेज में पुलिस पर एकतरफा खुली छूट देने पर आरोप लगाकर रालोद नेताओं ने हंगामा किया।
एनएएस और डीएन कॉलेज में एबीवीपी पैनल से प्रत्याशियों को घोषित न करने पर बखेड़ा हुआ है। एक-दूसरे पर छात्रों के गुटों ने साठगांठ कर पैनल से नाम घोषित करने का आरोप लगाए। उसके बाद छात्रों ने चुनाव को अपनी अपनी प्रतिष्ठा मानते दूसरे पैनल से नाम जोड़कर चुनाव लड़ा। शुक्रवार सुबह मतदान के दौरान एनएएस कॉलेज में छात्रों में मारपीट के बाद पथराव हो गया।
सिविल लाइन पुलिस ने दोनों पक्ष से करीब एक दर्जन छात्रों को पकड़ा और थाने ले आई। उसके बाद पुलिस ने सख्ती बरती। हालांकि दिनभर छात्र चुनाव के दौरान हंगामा करते रहे और पुलिस उनको खदेड़ती रही। छात्रों ने थाने में भी हंगामा किया। डीएन कॉलेज में सरेआम एबीवीपी पैनल के पक्ष में पुलिस होने की बात कही और रालोद नेताओं ने हंगामा कर दिया।
पुलिस से तीखी झड़प
डीएन कॉलेज में हंगामे की सूचना पर रालोद नेता राजीव बालियान, राजकुमार सांगवान, दुष्यंत रोहटा, संदीप चौधरी, जयराज सिंह डालमपुर मौके पर पहुंचे। पुलिस से उनकी झड़प हो गई। रालोद प्रत्याशी आशुतोष मलिक के पिता अनिल मलिक और उसके चाचा रविंद्र मलिक भी पहुंचे। मामला तूल पकड़ते देखकर सीओ कोतवाली भी मौके पर पहुंचे। सीओ कोतवाली ने रालोद नेताओं व छात्रों को समझाया शांत किया। कहा कि निष्पक्ष और सही चुनाव होगा। कोई दबाव नहीं दिया जाएगा। हंगामे करने वालों से पुलिस सख्ती से निपटेगी।
अतुल प्रधान लिखी टोपी पर एतराज
एनएएस कॉलेज के गेट पर समाजवादी छात्रसभा कार्यकर्ता अतुल प्रधान लिखी लाल रंग की टोपी पहनकर नारेबाजी कर रहे थे। पुलिस प्रशासन ने छात्रों को कॉलेज गेट से हटने को कहा। उसके बाद भी नेता गेट पर नारेबाजी करते रहे। पुलिस प्रशासन हरकत में आया। एक सीओ ने छात्रों से कहा कि जिस नेता का नाम टोपी पर है, वो फिलहाल वांछित चल रहा है। इतना सुनते ही छात्रों का हंगामा और तेज हो गया। पुलिस प्रशासन ने तभी छात्रों को गेट से हटाकर वहां बैरिकेडिंग लगा दी। लेकिन छात्र नेताओं को हंगामा कम नहीं हुआ। पुलिस अधिकारियों और छात्र नेताओं के बीच जमकर नोकझोंक हो गई। अधिकारियों ने नारेबाजी रोकने का आश्वासन दिया। जिसके बाद छात्र नारेबाजी करते हुए सड़क की दूसरी ओर चले गए।