पीवीवीएनएल के शहरी और ग्रामीण उपभोक्ताओं पर 6300 करोड़ से ज्यादा का बिल बकाया हो चुका है। इसमें ग्रामीण उपभोक्ताओं पर 5876 करोड़ रुपये तो शहरी उपभोक्ताओं पर 440 करोड़ रुपये का बिल बकाया है। ऐसे में कंपनी ने टीमों का गठन कर कनेक्शन काटने का अभियान तेजी से शुरू किया है। शत प्रतिशत बकाया बिल नहीं मिलने, बिजली चोरी और लाइन लॉस से बिजली कंपनियों को भारी घाटा उठाना पड़ रहा है। घाटे को कम करने के लिए कंपनियां हर साल बिजली दरों में वृद्धि कर देती हैं। इसका खामियाजा उन उपभोक्ताओं को भी उठाना पड़ता है, जो लगातार बिल दे रहे हैं।
मेरठ के उपभोक्ताओं पर 732 करोड़ रुपये
मेरठ के 149512 उपभोक्ताओं पर कंपनी का 732 करोड़ रुपये बकाया है। इसमें 134280 ग्रामीण उपभोक्ताओं पर 667 करोड़ और शहर के 15237 बड़े लोड वाले उपभोक्ताओं पर 65 करोड़ रुपये अटके हैं। ग्रामीण करते हैं ओटीएस का इंतजार
ग्रामीण बिजली उपभोक्ता हर साल आने वाली एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) का इंतजार करते हैं। इस योजना में उपभोक्ता के बकाये पर लगने वाले सरचार्ज को माफ कर दिया जाता है। इसके चलते अधिकतर ग्रामीण खासकर नलकूप उपभोक्ता छूट आने के बाद ही बिल अदा करते हैं।
पश्चिमांचल के ग्रामीण उपभोक्ताओं पर बकाया
जोन उपभोक्ता संख्या बकाया (करोड़ में)
मेरठ 134280 666
गाजियाबाद 30646 149
बुलंदशहर 131935 888
सहारनपुर 998767 2338
नोएडा 50223 233
मुरादाबाद 303219 1600
पश्चिमांचल के शहरी उपभोक्ताओं पर बकाया
जोन उपभोक्ता संख्या बकाया (लाख में)
मेरठ 15237 6542
गाजियाबाद 18418 5964
बुलंदशहर 8148 3352
सहारनपुर 13529 4993
नोएडा 5931 3377
मुरादाबाद 36665 19761
क्या बोले अधिकारी
ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं पर 6300 करोड़ रुपया बकाया हो गया है। बकाया बिल की वसूली के लिए कंपनी कनेक्शन काटने का अभियान चला रही है। परेशानी से बचने के लिए उपभोक्ता बकाया बिल जमा कर दें। -आशुतोष निरंजन, एमडी पीवीवीएनएल मेरठ