फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सरकारी अस्पतालों से रखेंगे योजना का मान, परेशानी में है आयुष्मान

विज्ञापन
विज्ञापन
सरकारी अस्पतालों से रखेंगे मान, परेशानी में आयुष्मान
विज्ञापन

मेरठ। सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना परेशानी में है। आईएमए का सहयोग नहीं मिल पाने और निजी अस्पतालों द्वारा दूरी बनाए जाने के कारण सरकारी अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को भी इस योजना में शामिल कर लिया गया है।
एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज, पीएल शर्मा जिला चिकित्सालय और जिला महिला अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत आने वाले मरीजों को कार्ड मुहैया कराए जाएंगे। दौराला, मवाना और सरधना सीएचसी पर भी इसी तरह कार्ड केजरिए भी इलाज किया जाएगा। जिस तरह सामान्य तौर पर इन स्थानों पर मरीज इलाज के लिए आते हैं, उसी तरह आयुष्मान योजना के कार्ड धारकों का भी इलाज किया जाएगा। योजना केलिए 60 फीसदी पैसा केंद्र सरकार और 40 फीसदी राज्य सरकार वहन करेगी। प्रधानमंत्री सितंबर केआखिरी सप्ताह में इस योजना का उद्घाटन कर सकते हैं।
विज्ञापन


यह कैसा कैशलेस इलाज
सरकारी अस्पतालों को इसमें शामिल करने से स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक भी हैरान हैं। दरअसल, सरकारी चिकित्सालयों में तो निशुल्क इलाज मिलता ही है। ऐसे में कैशलेस इलाज का फंडा उनकी समझ में नहीं आ रहा है। इसके अलावा यह डर भी है कि अलग से पैसा देने के बजाय कहीं सरकार इस व्यवस्था के बाद सरकारी अस्पतालों के पहले से चले आ रहे बजट में ही इसे शामिल न कर दें।

जो पैसे मिलेगा अस्पताल के सुधार में किया जाएगा इस्तेमाल
आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए भी कैशलेस कार्ड बनेंगे और जो पैसा सरकार की तरफ से आएगा, उसे अस्पतालों के सुधार में इस्तेमाल किया जाएगा।
- डॉ. राजकुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी

इन निजी अस्पतालों ने किया आवेदन
विजन केयर, सेंटर फॉर साइट, प्रकाश लेजर, लोकप्रिय, यशलोक, वर्धमान, केएमसी और दो अन्य। इनके अलावा आवेदन करने वाला एक अस्पताल स्वास्थ्य विभाग के मानकों पर खरा नहीं उतरा है, लिहाजा उसका आवेदन निरस्त किया गया है। सीएमओ ने बताया कि अभी कई और निजी अस्पतालों से बात चल रही है।

शामिल हुए तो होगा नुकसान
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारियों का मानना है कि इस योजना में शामिल होने से अस्पतालों को काफी नुकसान होगा। सरकार की यह स्कीम वास्तविकता से दूर है। सरकार की दी गई दरें बहुत कम हैं। सरकार को इलाज की दरें तकनीकी तरीके से तय करनी चाहिए। नहीं तो यह स्कीम भी दम तोड़ देगी।
विज्ञापन


मेरठ में दो लाख पांच हजार परिवारों को मिलना है लाभ
मेरठ में दो लाख पांच हजार 70 परिवार चिह्नित किए गए हैं। इनमें 83 हजार 70 परिवार देहात और 1.22 लाख परिवार शहरी क्षेत्र के हैं। 2011 की आर्थिक और सामाजिक गणना की सूची के आधार पर बनाया गया है। इस सूची में ही गड़बड़ी है। योजना के तहत सरकार करीब 10 करोड़ गरीब परिवारों को पांच लाख रुपये तक का कवर देगी। बीपीएल परिवार को 1352 तरह की जांच सर्जरी पांच लाख रुपये तक की निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जानी है।


खास बातें:
- आयुष्मान भारत योजना के कार्ड बनाकर किया जाएगा इलाज
- निजी अस्पताल बनाए हुए हैं दूरी, मशक्कत से जुड़े नौ अस्पताल
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें