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देश के गंदे शहरों में शुमार है मेरठ महानगर

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मेरठ। स्वच्छता के नाम पर भले ही सरकारी खजाने से लाखों रुपये खर्च किए जा चुके हों। लेकिन महानगर का नाम स्वच्छ शहरोें में शामिल नहीं हो सका। पिछले साल के मुकाबले रैंक में कुछ परिवर्तन तो हुआ। मगर मेरठ की रैंक इस बार भी शर्मसार करने वाली है। यानी मेरठ स्वच्छता में 326वें स्थान पर है। जबकि पड़ोसी शहर गाजियाबाद दूसरे स्थान पर पहुंच गया। वाराणसी से केवल एक पायदान नीचे है।
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स्वच्छता सर्वेक्षण में मेरठ नगर निगम तीन बार भाग ले चुका है। पिछले साल स्वच्छता सर्वेक्षण में मेरठ को 339वां स्थान मिला था। साल 2018 में चार जनवरी से 10 मार्च तक चले स्वच्छता सर्वेक्षण के प्रचार प्रसार से लेकर तरह-तरह के तरीके अपनाने के बाद भी मेरठ को स्वच्छता में अन्य शहरों के सामने शर्मिंदा होना पड़ा है। सरकार ने स्वच्छता सर्वेक्षण में शामिल रहे 4203 शहरों की रैंकिंग रिपोर्ट जारी की। जिसमें पश्चिम उप्र के कई शहरों से मेरठ काफी पीछे रह गया।
2019 में भी पिछड़ सकता है मेरठ
नगर निगम प्रशासन ने अगर कार्य प्रणाली में सुधार नहीं किया तो आगामी 2019 में होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण में भी मेरठ को निराशा हाथ लगेगी। कारण है कि न तो शहर की सफाई में कोई सुधार हो रहा है और न ही डोर-टू- डोर कूड़ा उठाने, कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाने, हर घर में शौचालय बनवाने का कार्य सही ढंग से हो रहा है। जन समस्याओं का निस्तारण भी निगम में नहीं हो रहा है। इन सभी बिंदुओं पर निगम में सुधार की संभावनाएं नजर नहीं आती हैं। जहां सफाई के नाम पर सफाई कर्मचारी आंदोलन की चेतावनी देना शुरू देते हैं, वहीं निगम के अधिकारी अपने स्तर की समस्याओं का भी समाधान नहीं कर रहे हैं। ये ही वह बिंदु हैं जिन पर नगर निगम के नंबर कटे हैं।
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नहीं हो सका कार्य
- डोर-टू-डोर कूड़ा उठना शुरू नहीं हुआ
- कूड़ा निस्तारण प्लांट फाइलों में ही दफन है
- शहर के हर घर में शौचालय नहीं बन सके हैं
पूरी करेंगे कमियां
स्वच्छता सर्वेक्षण में जो कमियां रह गयी थीं, उन्हें अगले वर्ष पूरा कर लिया जाएगा। इस बार मेरठ सुंदर शहरों में शामिल कराया जाएगा। -मनोज कुमार चौहान, नगरायुक्त
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खास बातें:
326वें स्थान पर सफाई व्यवस्था में अपना शहर अब
339 वें स्थान पर रहा था स्वच्छता सर्वेक्षण में विगत वर्ष
- स्वच्छता सर्वेक्षण के प्रचार प्रसार पर लाखों खर्च फिर भी स्थिति शर्मनाक

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