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343 में से 60 को निकली हाईरिस्क प्रेग्नेंसी

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343 महिलाओं में स60 को निकली हाई रिस्क प्रेग्नेंसी
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मेरठ। तेजी से घटते हीमोग्लोबिन और सेहत की अनदेखी के कारण महिलाएं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की चपेट में आ रही हैं। सोमवार को मेरठ में जिला अस्पताल और मेडिकल समेत 14 स्वास्थ्य केंद्रों पर 343 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई, जिनमें से 60 को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी निकली है।
इन महिलाओं की हीमोग्लोबिन शुगर, ब्लड प्रेशर, यूरिन में एल्बुमिन और ओवरवेट आदि की जांच की गई। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में हीमोग्लोबिन का स्तर 5 से कम रह जाता है, जबकि महिलाओं में 10 से 12 का स्तर होना चाहिए। गर्भावस्था केदौरान महिलाओं को काफी एहतियात बरतने की जरूरत होती है। लापरवाही की वजह से वह हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की चपेट में आ जाती हैं। गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन की स्तर बढ़ाने के लिए 90 दिन के लिए 180 आयरन की टेबलेट्स दी जाती हैं।
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सीएमओ डॉ. राजकुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग केआंकड़ों के मुताबिक मेरठ में 54 हजार 831 गर्भवती महिलाएं हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत प्रत्येक माह की नौ तारीख को सभी गर्भवती महिलाओं को व्यापक और गुणवत्तायुक्त प्रसव पूर्व देखभाल प्रदान करना सुनिश्चित किया जाता है। इस अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर उनकी गर्भवस्था के दूसरी और तीसरी तिमाही की अवधि (गर्भवस्था के चार महीने के बाद) जांच कराई जाती है। इसका उद्देश्य यह है कि अगर गर्भवती महिला की विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा कम से कम एक बार उचित जांच कराई जाए और उसका उचित पालन किया जाए तो इस प्रक्रिया के परिणाम स्वरूप मातृ एवं नवजात की मौतों की संख्या में कमी लाई जा सकती है।

यह है हाई रिस्क प्रेग्नेंसी
अगर किसी गर्भवती महिला को खून की कमी है। ब्लड प्रेशर की समस्या है या वह डायबिटिक (मधुमेह) से पीड़ित है, इसकेअलावा पूर्व में ऑपरेशन से डिलीवरी हो चुकी है तो ऐसी महिलाओं को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) की श्रेणी में रखा जाता है।
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इन गर्भवती महिलाओं को है ज्यादा खतरा
मोटापे की शिकार महिलाओं को।
जो खून की कमी से ग्रस्त हो।
जिनका एक से अधिक बार गर्भपात हो चुका हो।
मधुमेह, उच्च रक्तचाप, टीबी, पीलिया आदि रोग से ग्रस्त।

ऐसे करें बचाव
डॉक्टर की देखरेख में नियमित टेस्ट कराते रहना चाहिए।
साग, पालक और फलों का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए।
आलस छोड़कर एक्टिव बने रहना चाहिए।
डॉक्टर की सलाह से हल्का व्यायाम करते रहना चाहिए।

राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस कल
11 अप्रैल (बुधवार) को देशभर में राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस मनाया जाएगा। इसका उद्देश्य है कि जच्चा बच्चा की सेहत का पूरा ख्याल रखा जाए। दरअसल, राष्ट्रीय हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (एचएमआईएस) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पिछले एक साल में प्रदेश में 1627 गर्भवती महिलाओं की मौत डिलीवरी के दौरान हुई थीं। गर्भवती महिलाओं की मृत्युदर में मेरठ का प्रदेश के 75 जिलों में 24वां स्थान है, पिछले साल यहां 23 मौत हुई थीं।
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