भाजपा भी चली सपा की तर्ज पर
जिला पंचायतों के बाद अब समितियों और ब्लाक प्रमुखों पर भी नजर
मेरठ।
भारतीय जनता पार्टी भी इस समय सपा की तर्ज पर चलती नजर आ रही है। जिस तरह 2012 में सपा सरकार बनने पर बसपा शासन के पंचायती विभाग के साथ ही समितियों और संघों पर सपा ने कब्जा किया था। उसी तरह भाजपा भी अब इसी तरफ बढ़ती नजर आ रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिला पंचायत अध्यक्ष जहां कुर्सी से बेदखल हो चुके हैं, तो अब नजर अन्य पदों पर भी है।
बसपा शासनकाल में पंचायत चुनाव में जितने भी जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लाक प्रमुख, सहकारी बैंक चेयरमैन, दुग्ध संघ आदि पर बसपा प्रतिनिधियों का कब्जा था। लेकिन जैसे ही 2012 में सपा सरकार बनी, अधिकांश पदों पर सपाई कब्जा करते चले गये। इसमें कुछ को अविश्वास के जरिये हटाया तो कुछ ने खुद ही बसपा छोड़ सपा का दामन थाम कुर्सी बचा ली। इस दौरान हुए सहकारी समितियों के चुनाव से लेकर बैंक चेयरमैन, गन्ना समिति चेयरमैन, दुग्ध संघ आदि पदों पर सपा ने कब्जा किया।
अब प्रदेश में भाजपा की सरकार है। पंचायत चुनाव पिछले साल ही सपा शासनकाल में हुए थे और अधिकांश जिला पंचायत और ब्लाक प्रमुखों के साथ उसी समय में तमाम समितियों पर सपाई काबिज थे। भाजपा सरकार बनते ही सबसे पहला झटका पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेरठ में लगा जहां सपा की जिला पंचायत अध्यक्ष को अविश्वास प्रस्ताव आने के चलते इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद एक-एक कर गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर, बिजनौर आदि जनपदोें में इसकी शुरूआत हो चुकी है और ब्लाक प्रमुखाें पर भी नजर हैं।
वहीं दूसरी तरफ अब भाजपा सहकारी समितियों और संघों पर कब्जे की रणनीति तैयार कर चुकी है। इसके लिए तमाम भाजपा नेता सक्रिय हो चुके हैं और पिछले दरवाजे से समितियों को पंजीकृत कराने में लगे हैं। दिसंबर 2017 से सहकारी समितियों और संघों के चुनाव शुरू हो जाएंगे। जिसकी तैयारी में भाजपाई जुट गए हैं। भाजपा सूत्रों का कहना है कि नेतृत्व ने भी इसकी स्वीकृति दे दी है।