60 पार्षदों ने चुना था प्रथम मेयर, अब चुनेंगे 12.58 लाख मतदाता
मेरठ। नगर महापालिका बनने पर 30 वार्डों के 60 पार्षदों ने 1989 में मेरठ के पहले मेयर (नगर प्रमुख) अरुण जैन को चुना था। 1995 में 70 वार्डों की जनता ने सीधे अयूब अंसारी को मेयर चुना और उनके ही कार्यकाल में महापालिका को नगर निगम बनाया गया। अब 2022 में 12.58 लाख मतदाता महापौर का चुनाव करेंगे।
मेरठ नगर महापालिका बनने पर नगर प्रमुख सीधे जनता की बजाय पार्षदों द्वारा चुना जाता था। उस समय शहर में 30 वार्ड थे और प्रत्येक वार्ड से दो पार्षद चुने जाते थे। जबकि अगले चुनाव 1995 में ही जनता द्वारा सीधे नगर प्रमुख चुने जाने की व्यवस्था लागू की गई। इस चुनाव से पहले सीमा विस्तार करके महानगर में 70 वार्र्डों का गठन हुआ और एक वार्ड से एक ही पार्षद के चुनाव की व्यवस्था लागू की गई। उसके बाद वार्डों की संख्या पहले 80 और उसके बाद 90 हुई और पिछले चुनाव से अब इस बार भी 90 वार्डों का ही बोर्ड रहेगा।
शहर के पहले नगर प्रमुख रहे अरुण जैन के स्वभाव और कार्य को जनता आज भी याद करती है। उनके बोर्ड के पार्षद बताते हैं कि अरुण जैन विकास करके मेरठ को पेरिस बनाने का सपना संयोए थे। उन्होंने आबूनाले की सुंदरता समेत कई कई नए प्लान तैयार किए। वह अलग बात है कि कहीं जनता द्वारा विरोध तो कहीं कुछ अन्य कारणों के चलते अरुण जैन अपने सपने को पूरा नहीं कर पाए।
"बे-कार" पार्षद भी बन गए कारवाले
-नगर प्रमुख अरुण जैन के कार्यकाल को वे पार्षद कभी नहीं भूल पाएंगे जो बे-कार थे और नगर प्रमुख को चुनने की एवज में वे कारवाले बन गए थे। जेलचुंगी चौराहे के निकट अरुण जैन के आवास "आसावरी महल" में सभी सभासदों का डेरा रहता था। जहां होने वाली आए दिन पार्टियों में दावत और पानी की तरह पैसा बहाने की चर्चाएं महानगर में गर्म रहती थीं।
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बढ़ रहा महानगर, जनसंख्या हुई 16 लाख
-महानगर का विस्तार होता जा रहा है। 2011 की जनगणना के अनुसार जनसंख्या 13 लाख 5429 थी। अब जनसंख्या का आंकड़ा 16 लाख से भी अधिक माना जाता है। जिस प्रकार महानगर का विस्तार और जनसंख्या बढ़ रही है। उसी के अनुपात में सफाई, पथ प्रकाश, जलनिकासी के साधन, सड़क, जलापूर्ति आदि संसाधनों के साथ ही कर्मचारियों का भी बढ़ाया जाना जरूरी हो गया है। अगर समय रहते संसाधन नहीं बढ़ाए गए तो इसका असर विकास पर दिखेगा।
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-1995 में नगर महापालिका के 70 वार्ड थे। और सीधे जनता ने वोट देकर बसपा के अयूब अंसारी को नगर प्रमुख चुना था। हालांकि बाद में नगर निगम बनने पर नगर प्रमुख (मेयर) का पद महापौर के नाम से जाना गया।
-वर्ष 2000 में 70 वार्डों की जनता ने बसपा के हाजी शाहिद अखलाक को महापौर चुना।
-वर्ष 2006 में निगम के 80 वार्ड हो गए। भाजपा की मधु गुर्जर को जनता ने महापौर चुना।
-वर्ष 2012 में 90 वार्डों की जनता ने भाजपा के हरिकांत अहलुवालिया को महापौर चुना।
-2017 में 90 वार्डों की ही जनता ने बसपा की सुनीता वर्मा को अपना महापौर चुना।