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हर साल खर्च हो रहे 550 करोड़, शिक्षा दो कौड़ी की

Sat, 06 Jul 2019 04:07 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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सीसीएसयू
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मेरठ। इंटरमीडिएट के होनहार डिग्री कॉलेजों में पहुंचते ही फिसड्डी साबित हो रहे हैं। हायर एजूकेशन में इससे बदरंग तस्वीर नहीं हो सकती। ये भी तब है, जबकि इन छात्र-छात्राओं को पढ़ाने में सरकार हर साल 550 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च कर रही है। अरबों रुपयों की बिल्डिंग और संसाधनों का इस्तेमाल हो रहा है। इसके बाद भी इन कॉलेजों से ज्यादा अच्छे वे छात्र-छात्राएं निकल रहे हैं, जो घर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। प्राइवेट में इस बार रेग्युलर से ज्यादा छात्र-छात्राएं पास हुए हैं। कॉलेजों में न छात्र ठीक से पढ़ रहे हैं, न उनको ढंग से पढ़ाया जा रहा है।
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मेरठ और सहारनपुर मंडल के 50 एडेड कॉलेजों के शिक्षकों-कर्मचारियों की सैलरी क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी कार्यालय से रिलीज होती है। 15 राजकीय कॉलेजों की सैलरी लखनऊ से जारी होती है। इन कॉलेजों में डेढ़ हजार से ज्यादा शिक्षक और कर्मचारी काम करते हैं। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी के कार्यालय से अकेले मई महीने में 50 एडेड कॉलेजों के लिए 25 करोड़ 40 लाख 69648 रुपये सैलरी जारी की गई। पूरे साल की बात करें तो यह रकम 300 करोड़ रुपये से ज्यादा हो जाती है। 15 राजकीय कॉलेजों में हर महीने चार करोड़ रुपये से ज्यादा सैलरी आती है। पूरे साल में यह रकम 48 करोड़ से ज्यादा हो जाती है। यानी एक साल में इन कॉलेजों में सिर्फ सैलरी पर ही सरकार साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये खर्च कर रही है। सीसीएसयू विश्वविद्यालय के बजट की बात करें तो यह 200 करोड़ के करीब है। इतना भारी भरकम बजट कॉलेजों की परीक्षाओं से लेकर तमाम मदों में खर्च होता है। ऐसे में सीसीएसयू के छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर हर साल 550 करोड़ खर्च होते हैं। यूजीसी से मिलने वाली ग्रांट की राशि अलग है।
एक तरफ जहां 550 करोड़ खर्च वाले बीए प्रथम वर्ष रेग्युलर में 36.18 फीसदी छात्र-छात्राएं पास हुए हैं। वहीं, घर बैठकर पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं के पास होने का प्रतिशत अधिक है। बीए प्रथम वर्ष प्राइवेट में 37.44 फीसदी छात्र पास हुए हैं, जोकि रेग्युलर से अधिक हैं। बीए द्वितीय वर्ष प्राइवेट में 67.12 फीसदी छात्र पास हुए हैं। फाइनल ईयर में 87.11 फीसदी छात्र-छात्राएं पास हैं।
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कॉलेजों में गिर रहा पढ़ाई का स्तर
यह स्थिति सिर्फ इसी साल की नहीं है। कॉलेजों में पढ़ाई का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। साल 2017 की बात करें तो बीए प्रथम वर्ष में सिर्फ 41.02 फीसदी छात्र-छात्राएं पास हुए। बीएससी प्रथम वर्ष में 33.35 पास हुए। बीकॉम प्रथम वर्ष में 58.95 फीसदी छात्र-छात्राएं पास हुए। यही हाल वर्ष 2018 में रहा। बीए प्रथम वर्ष में 35.65 फीसदी छात्र-छात्राएं पास हुए। बीएससी प्रथम वर्ष में 35.75 फीसदी छात्र-छात्राएं पास हुए। बीकॉम प्रथम वर्ष में 52.48 फीसदी छात्र-छात्राएं पास हुए।
फाइनल तक 60 फीसदी छात्र-छात्राएं बाहर
डिग्री कॉलेजों में 60 फीसदी छात्र-छात्राएं फाइनल ईयर तक पहुंचते-पहुंचते बाहर हो रहे हैं। 2019 की ही बात करें तो बीए प्रथम वर्ष में जहां 48635 छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए। वहीं, द्वितीय वर्ष में इनकी संख्या 32576 रह गई। तृतीय वर्ष में सिर्फ 26153 संख्या रह गई। बीएससी प्रथम वर्ष में 18974 छात्र-छात्राएं थे। तृतीय वर्ष में इनकी संख्या 7683 रह गई। बीकॉम में 17563 छात्र-छात्राएं थे, तृतीय वर्ष में इनकी संख्या 12821 रह गई।

75 फीसदी हाजिरी हो तो आए सुधार
कुछ गर्ल्स कॉलेजों को छोड़ दें तो कोएड कॉलेजों का हर जिले में बुरा हाल है। यहां पर एडमिशन फुल हैं लेकिन कक्षाओं के समय छात्र नजर नहीं आते। सवाल ये है कि जब शासन ने 75 फीसदी हाजिरी अनिवार्य कर रखी है, तो फिर न आने वालों की कॉलेजों में फर्जी हाजिरी क्यों लग जाती है। सीसीएसयू के कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने सभी कॉलेजों में बायोमीट्रिक हाजिरी और हर महीने ऑनलाइन डाटा वेबसाइट पर डालने को कहा था, लेकिन किसी कॉलेज ने ऐसा नहीं किया।
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2019 रेग्युलर       - कुल     - पास  - पासिंग परसेंट
रिजल्टऱ् बीए प्रथम - 48635-   17598 - 36.18
     बीए द्वितीय - 32576 - 20583 - 63.18
     बीए तृतीय  - 26153 - 23923 - 91.47

    बीएससी प्रथम - 18974 - 6573 - 34.64
    बीएससी द्वितीय - 10187 - 4335 - 42.66
    बीएससी तृतीय - 7683 - 7503 - 97.88
    बीकॉम प्रथम - 17563 - 9355 - 53.27
    बीकॉम द्वितीय - 14225- 11699- 82.03
    बीकॉम तृतीय - 12821 - 12164 - 94.88
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