- कॉलेजों के प्राचार्य बोले, यूनिवर्सिटी प्रशासन का अच्छा निर्णय
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। सीसीएसयू से संबद्ध कॉलेजों में यूजी फाइनल ईयर में रविवार को हुई एकेडमिक काउंसिल की बैठक में निगेटिव मार्किंग का निर्णय लिया गया था। इस संबंध में कॉलेजों के प्राचार्यों ने कहा कि शिक्षा में सुधार के लिए यह बेहतर कदम है। इससे पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार आएगा। छात्र-छात्राओं के भविष्य के लिए भी यह अच्छा फैसला है।
मेरठ कॉलेज की प्राचार्या डॉ. आभा चंद्रा का कहना है कि सभी विभागाध्यक्ष भी फाइनल में आब्जेक्टिव पेपरों को लेकर अपनी रिपोर्ट दे रहे थे। बताया जा रहा था कि छात्रों को गुणवत्तापरक शिक्षा के लिए बदलाव जरूरी है। ऐसे में इससे पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार होगा। डीएन कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बीएस यादव ने बताया कि कई साल से फर्स्ट और सेकेंड ईयर में नंबर बेहद कम आ रहे थे, जबकि फाइनल में इसका उलटा हो रहा था। इसेे लेकर सभी कॉलेजों की तरफ से सुझाव दिए गए थे। अब जो नियम लागू किया गया है, उससे गुणवत्ता बढ़ेगी। छात्र-छात्राओं को भविष्य में इसका फायदा मिलेगा। आरजी कॉलेज की प्राचार्या डॉ. अर्चना शर्मा का कहना है कि ऑब्जेक्टिव पेपर बेहद आसान आते हैं। 100 सवालों को आधा से एक घंटे में ही पूरा कर लिया जाता है। ऐसे में गुणवत्ता परक शिक्षा के लिए निगेटिव मार्किंग जरूरी थी। एक चौथाई नंबर ही कम होंगे, लेकिन इससे छात्र-छात्राएं ओर मेहनत करके ही पढ़ेंगे।
ये हुआ है निर्णय
सीसीएसयू से संबद्ध कॉलेजों में चल रहे बीए, बीएससी, बीकॉम में साल 2014 से फाइनल ईयर में ऑब्जेक्टिव पेपर होते हैं। फर्स्ट और सेकेंड ईयर में लिखित परीक्षा होती है। ऑब्जेक्टिव परीक्षा में एक-एक नंबर के 100 सवाल आते हैं। इस पेपर को लेकर कॉलेजों से कई साल से रिपोर्ट आ रही थी कि पेपर के पैटर्न से पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इसेे लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन कई महीनों से बदलाव पर विचार कर रहा था। अब तय हुआ है कि चार प्रश्नों का गलत उत्तर देने पर एक नंबर कट जाएगा। निगेटिव मार्किंग से स्थिति सुधरेगी।