मॉडरेशन रहेगा खास, ‘फेल’ भी हो जाएंगे पास
यूपी बोर्ड
- पिछले साल की ही तरह अंक दिए जाने का कयास
- किसी को नहीं पता, कौन से मॉडरेशन नीति अपनाई जा रही
- बड़ी संख्या में कॉपियां खाली मिलने के बाद भी बढ़ गया था रिजल्ट प्रतिशत
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। यूपी बोर्ड में इस बार भी पिछले साल की ही तरह मॉडरेशन खास रहेगा। कयास है कि भले ही कॉपियां खाली हों, नकल पर शिकंजे की वजह से परीक्षार्थी पास करने के लिए गुहार लगा रहे हों और कॉपियों में पैसे रख रहे हों, मगर फिर भी उनके अंक बेहतर आने की उम्मीद है। दरअसल, यूपी बोर्ड में फिर से ‘गोपनीय मॉडरेशन व्यवस्था’ लागू रहना बताया जा रहा है। गोपनीय इसलिए क्योंकि कितने अंकों का मॉडरेशन है, यह स्पष्ट नहीं है।
दरअसल, पिछले साल हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के रिजल्ट प्रतिशत को लेकर हैरानी जताई गई थी। आलम यह था कि परीक्षक ही नहीं, खुद विद्यार्थी भी सोच में थे कि उन्हें इतने अंक कैसे मिल गए। इसे ‘मॉडरेशन नीति’ केतहत तैयार किया गया रिजल्ट बताया गया, लेकिन यह कैसे हुआ, इसे लेकर कोई बोलने को तैयार नहीं था। यूपी बोर्ड के सूत्र इस बार भी ऐसा ही बता रहे हैं।
इस बार भी नकल पर नकेल थी। उत्तर पुस्तिकाएं खाली मिल रही हैं। परीक्षकों की आशंका हैं कि रिजल्ट 50 फीसदी भी पार नहीं कर पाएगा। पिछली बार भी ऐसा था, लेकिन हुआ इससे एकदम उलट था। मेरठ का रिजल्ट प्रतिशत घटने की बजाय बढ़ गया था। ये कैसे हुआ था, इसे लेकर तरह-तरह के कयास थे। पिछली बार हाईस्कूल का रिजल्ट 86.20 और इंटरमीडिएट का 83.39 प्रतिशत रहा था, जो उम्मीद से कहीं ज्यादा था। हाईस्कूल में पासिंग प्रतिशत के आधार पर मेरठ का प्रदेश में 8वां स्थान था, जबकि इंटरमीडिएट में 19वां। जबकि वर्ष 2017 में मेरठ हाईस्कूल में प्रदेश में 34वें और इंटरमीडिएट में 38वें स्थान पर था। हाईस्कूल का रिजल्ट 82.06 प्रतिशत और इंटरमीडिएट का 83.35 प्रतिशत रहा था। वहीं वर्ष 2016 में मेरठ हाईस्कूल में प्रदेश में 37वें और इंटर में 50वें स्थान पर था। इंटरमीडिएट का रिजल्ट 88.45 प्रतिशत और हाईस्कूल का रिजल्ट 87.50 प्रतिशत रहा था।
इस संबंध में यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय सचिव राणा सहस्त्रांशु सिंह सुमन का कहना है कि वह इस बारे में कुछ भी कहने के लिए अधिकृत नहीं हैं। रिजल्ट इलाहाबाद से जारी होता है। वहीं से इस बारे में जानकारी मिल सकती है।
यह है मॉडरेशन
मॉडरेशन के तहत 10वीं-12वीं की परीक्षा कराने वाले बोर्ड सभी विद्यार्थियों को विषय विशेष में अतिरिक्त अंक देते हैं। उदाहरण अगर 12वीं में विद्यार्थी को चार विषयों में तो बहुत अच्छे अंक मिले हैं, लेकिन किसी एक विषय में औसत से भी कम अंक हैं। ऐसी स्थिति में बोर्ड के जिम्मेदार एक फार्मूले को आधार मानते हुए उस विषय में सभी छात्रों को एक, दो, तीन या अधिकतम आठ अंक तक अतिरिक्त दे सकते हैं। अतिरिक्त अंक एक, दो या तीन विषयों में दिए जा सकते हैं। गौरतलब है कि सीबीएससी-सीआईएससीई ने मॉडरेशन पॉलिसी खत्म कर दी है। सीबीएसई और सीआईएससीई बोर्ड के छात्र-छात्राओं की तुलना में यूपी बोर्ड के विद्यार्थियों केअंक 10वीं-12वीं की परीक्षा में कम होने के कारण 2011 में मॉडरेशन नीति लागू की गई थी।
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सोशल मीडिया पर हुआ था वायरल
पिछले साल मूल्यांकन के बाद शिक्षक एक परिपत्र (अवॉर्डशीट) पर अंक चढ़ाते हैं। सोशल मीडिया पर ऐसे काफी रोल नंबर वायरल हुए थे, जिनकी मार्कशीट में मिले अंक और अवॉर्डशीट में लिखे अंकों में 20 से ज्यादा अंकों का अंतर था। इस बार परीक्षकों के मोबाइल से फोटो खींचने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। मीडिया की एंट्री भी बैन कर दी गई है। इसी वजह से कयास जोर मार रहे हैं।
अभी तक इस तरह किया जाता था पास
पिछले साल से पहले तक अगर कोई परीक्षार्थी पांच विषयों में पास और किसी एक विषय में फेल होता था या फिर एक विषय के पेपर में अनुपस्थित रहता था तो भी वह पास माना जाता था। अगर वह चाहे तो एक विषय की कंपार्टमेंट परीक्षा दे सकता था। इंटरमीडिएट में सभी मुख्य विषयों के दो-दो पेपर होते थे। अगर परीक्षार्थी ने एक पेपर की परीक्षा में 27 अंक अर्जित कर लिए और दूसरे में फेल हो गया या अनुपस्थित था, तब भी उसे पास कर दिया जाता था। बोर्ड उसे दूसरे पेपर में 8 अंक का ग्रेस देकर पास कर देता था।