परीक्षा एक उत्सव है, इसे त्योहार की तरह लीजिये
- सीबीएसई ने जारी किया राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग अध्यक्ष का पत्र
- एनसीपीसीआर 15 मार्च तक चलाएगा विशेष जागरुकता अभियान
मेरठ। परीक्षा एक उत्सव है, इसे ऐसे लीजिये जैसे मानो एक त्यौहार है। 02 मार्च से सीबीएसई की बोर्ड परीक्षाएं प्रारंभ हो रही हैं। बोर्ड परीक्षा में छात्र तनाव से दूर रहें। नंबरों का दवाब छोड़कर पढ़ाई पर ध्यान दें। कम अंकों का स्ट्रेस लेकर आत्महत्या जैसा घातक कदम न उठाएं। छात्रों को संबोधित करते हुए सीबीएसई के पोर्टल पर बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो का पत्र जारी हुआ है। अध्यक्ष ने छात्रों व स्कूल एजुकेशन और लिट्रेसी विभाग की सचिव रीना रॉय को संबोधित किया है।
अध्यक्ष का कहना है कि अध्यक्ष ने पत्र में लिखा है जैसा आप जानते हैं कि दुनिया का सबसे ज्यादा सुसाइड रेट भारत में है। इसमें बड़ी संख्या छात्रों की है जो परीक्षा के तनाव के दवाब में आकर आत्महत्या की रह पर चल पड़ते हैं। एनसीआरबी के डाटा के आंकड़ों के अनुसार 2014 से 2016 के दौरान देश में 26476 छात्रों ने आत्महत्या करी। 7462 युवाओं ने विभिन्न परीक्षाओं में फेल होने के कारण आत्महत्या को चुना। परीक्षा के दौरान छात्र सबसे ज्यादा तनाव में होते हैं। अभिभावकों का दवाब, अंकों का दवाब, फेल होने का दवाब सबसे ज्यादा होता है। यह दवाब कब आत्महत्या का कारण बन जाता है पता भी नहीं चलता। इसलिए छात्र परीक्षा को एक उत्सव मानें। छात्रों को परीक्षा के तनाव से मुूक्त करने के लिए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग विशेष अभियान चला रहा है। यह अभियान 15 मार्च तक जारी रहेगा। इस अभियान में रेडियो, टीवी, मीडिया व पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से छात्रों व अभिभावकों की काउंसलिंग की जाएगी। लाइव स्ट्रीम सेशन भी होंगे जिसमें छात्रों के तनाव को दूर किया जाएगा। एमएचआरडी व आयोग के फेसबुक पेज व बेवसाइट पर भी इस अभियान की पूरी जानकारी है जिसका लाभ छात्र ले सकते हैं।
आसान रहा आर्ट्स का पेपर खिले चेहरे
मेरठ। आईसीएसई की बोर्ड परीक्षाओं में बृहस्पतिवार को12वीं में आर्ट का पेपर हुआ। छात्रों के अनुसार कुछ भी सिलेबस से बाहर नहीं था। पेपर बहुत आसान और सरल था। छात्र खुश होकर पेपर देकर निकले।